रावलकोट: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से एक बड़ी खबर सामने आई है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने दावा किया है कि रावलकोट में लॉन्ग मार्च के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से भी इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
JAAC द्वारा जारी एक वीडियो संदेश के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का काफिला चिनार चौक पहुंचने के बाद मकबूल भट शहीद चौक पर रात्रि विश्राम की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दीं। संगठन का आरोप है कि गोलीबारी में कई युवाओं की मौके पर ही मौत हो गई।
वीडियो संदेश में JAAC के प्रतिनिधियों ने कहा कि मारे गए लोगों में आंदोलन के संस्थापक उमर नजीर कश्मीरी के छोटे भाई उस्मान नज़ीर भी शामिल हैं। इसके अलावा खैगाला, कोटली, टट्टापानी, बंजा-बासपुर, छोटा गाला और हवेली क्षेत्रों के लोग भी मृतकों में बताए गए हैं। संगठन ने यह भी दावा किया कि मृतकों में दो बलूच नागरिक भी शामिल हैं।
JAAC ने पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से निकाले जा रहे लॉन्ग मार्च को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने हिंसक कार्रवाई की। संगठन ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।
वीडियो में विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों से भी अपील की गई है कि वे पाकिस्तानी दूतावासों और संयुक्त राष्ट्र (UN) समेत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के सामने विरोध प्रदर्शन करें। JAAC का कहना है कि दुनिया को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रही घटनाओं की जानकारी मिलनी चाहिए और इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
संगठन ने दावा किया कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। JAAC नेताओं ने कहा कि वे अपने अधिकारों और मांगों के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने लोगों से संयम बनाए रखने और आंदोलन का समर्थन करने की अपील भी की।
JAAC द्वारा जारी मृतकों की सूची
संगठन ने जिन लोगों के नाम जारी किए हैं, उनमें नईम बट (कोटली), उस्मान नज़ीर (रावलकोट), निसार अहमद (बलूच), काशिफ याकूब (रावलकोट), सरदार फिदा हुसैन (त्रारखाल), मुज़म्मिल (अली सोजल), बासित शाह (हजीरा), फहीम अफजल (छोटा गाला, रावलकोट) और कामरान मुश्ताक पनाखा (हजीरा) शामिल हैं। JAAC का दावा है कि अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
फिलहाल इस घटना को लेकर कई दावे और प्रतिदावे सामने आ रहे हैं। स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों या मीडिया संस्थानों द्वारा अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है। यदि JAAC के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकारों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

