10 Sep 2026, Thu

नेपाल से सामने आई दर्दनाक खबर, भीषण बाढ़ के बाद करीब 500 छात्र लापता, 31 शिक्षक संपर्कविहीन

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और इसके बाद पैदा हुई तबाही का असर अब भी दिखाई दे रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें स्कूली विद्यार्थी और शिक्षक भी शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रसुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 500 विद्यार्थी अब तक अपने परिवार और प्रशासन के संपर्क में नहीं आ पाए हैं। इसके अलावा 31 शिक्षकों के भी लापता होने की बात सामने आई है।

रसुवा में 285 विद्यार्थी संपर्कविहीन

रसुवा जिले में बाढ़ के बाद 285 विद्यार्थियों का अब तक पता नहीं चल पाया है। जिला प्रशासन की शिक्षा इकाई के अनुसार, आपदा के बाद से इन विद्यार्थियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, जिले में संपर्कविहीन 17 शिक्षकों में से एक का शव बरामद किया जा चुका है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रसुवा में 39 ऐसे विद्यार्थी भी हैं, जिनके माता-पिता दोनों ही अभी तक संपर्क में नहीं हैं। ऐसे परिवारों के सामने बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके भविष्य को लेकर भी बड़ी चिंता बनी हुई है।

चार स्कूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त

बाढ़ ने रसुवा की शिक्षा व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में चार स्कूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इनमें तीन सामुदायिक विद्यालय और एक संस्थागत विद्यालय शामिल है। कई अन्य स्कूलों को भी नुकसान पहुंचा है।

हालांकि, जिन विद्यालयों पर बाढ़ का ज्यादा असर नहीं पड़ा है, वहां दोबारा पढ़ाई शुरू की जा रही है। नौकुण्ड में 27 अगस्त से, कालिका में 7 सितंबर से और उत्तरगया तथा आमाछोदिङ्मो में 9 सितंबर से कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। गोसाइंकुंड में 11 सितंबर से पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है।

नुवाकोट में 224 विद्यार्थी लापता

नुवाकोट जिले में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां 224 विद्यार्थियों और 11 शिक्षकों के अब तक संपर्कविहीन होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ से जिले के 10 स्कूल प्रभावित हुए हैं, जिनमें दो संस्थागत विद्यालय शामिल हैं।

क्षतिग्रस्त स्कूलों को फिलहाल होल्डिंग सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, जिन विद्यालयों को कम नुकसान हुआ है, वहां पढ़ाई दोबारा शुरू कर दी गई है। विदुर नगरपालिका क्षेत्र में भी स्कूल खोलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

वैकल्पिक व्यवस्था से जारी होगी पढ़ाई

बाढ़ में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए स्कूलों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें दूसरे विद्यालयों में स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। कुछ स्थानों पर आवासीय व्यवस्था के तहत बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की योजना बनाई जा रही है।

प्रशासन और शिक्षा विभाग सरकारी तथा गैरसरकारी संस्थाओं की मदद से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने में जुटे हैं। क्षतिग्रस्त विद्यालयों को दोबारा शुरू करने के लिए भवन या जमीन उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई जा रही है। स्थानीय स्तर पर सामुदायिक भवनों के इस्तेमाल और अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराने पर भी विचार हो रहा है।

विस्थापितों के साथ पढ़ाई की भी चुनौती

होल्डिंग सेंटर बनाए गए कुछ स्कूलों में आधे हिस्से में कक्षाएं और बाकी हिस्से में बाढ़ प्रभावित विस्थापित लोगों को रखने की योजना है। शिक्षा मंत्रालय ने आवासीय तरीके से स्कूल संचालित करने के लिए बजट प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता विद्यार्थियों और शिक्षकों का पता लगाना है। इसके साथ ही हजारों बच्चों की पढ़ाई दोबारा पटरी पर लाना भी प्रशासन के लिए अहम जिम्मेदारी बनी हुई है। रेस्क्यू अभियान और राहत कार्यों के साथ शिक्षा व्यवस्था को सामान्य करने की कोशिशें लगातार जारी हैं।

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