इंडियन गैस एक्सचेंज (IGX) का पूंजी बाजार की ओर कदम, NSE ने घटाई हिस्सेदारी; IPO की तैयारी तेज
इंडियन गैस एक्सचेंज (IGX), जो भारत का पहला ऑनलाइन डिलीवरी-आधारित नेचुरल गैस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, अब पूंजी बाजार में प्रवेश की दिशा में आगे बढ़ रहा है। साथ ही, इसके शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने नियामकीय नियमों का पालन करते हुए IGX में अपनी हिस्सेदारी में थोड़ी कटौती की है।
पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) के नियमों के अनुसार, किसी भी एक इकाई की हिस्सेदारी गैस एक्सचेंज में 25% से अधिक नहीं हो सकती। इसी नियम का पालन करते हुए NSE ने अपनी करीब 1% हिस्सेदारी बेच दी, जिससे उसकी कुल हिस्सेदारी घटकर 25% रह गई। NSE ने मार्च 2021 में PNGRB की मंजूरी के बाद लगभग 19 करोड़ रुपये में 26% हिस्सेदारी खरीदकर IGX में सह-प्रवर्तक के रूप में प्रवेश किया था।
IGX एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है जहां नेचुरल गैस की स्पॉट, फॉरवर्ड और डिलीवरी-आधारित ट्रेडिंग की सुविधा उपलब्ध है। यह प्लेटफॉर्म देश में गैस की कीमतों को पारदर्शी बनाने और बेहतर मूल्य खोज (price discovery) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
हाल ही में NSE और IGX ने मिलकर घरेलू नेचुरल गैस कीमतों पर आधारित डेरिवेटिव्स लॉन्च करने की घोषणा भी की है। ये कॉन्ट्रैक्ट्स IGX के बेंचमार्क इंडेक्स “Gas IndeX of India (GIXI)” पर आधारित होंगे, जो एक्सचेंज पर होने वाले वास्तविक लेनदेन की कीमतों को दर्शाता है।
इसके अलावा, IGX अब पूंजी बाजार में प्रवेश करने की तैयारी भी कर रहा है। कंपनी ने पहले संकेत दिया था कि वह दिसंबर तक आईपीओ लाने की योजना बना रही है। हालांकि अब यह प्रक्रिया आगे बढ़ गई है और उम्मीद है कि 2026 की दूसरी तिमाही में कंपनी अपने ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट्स SEBI के पास दाखिल कर सकती है।
IGX के प्रबंध निदेशक और CEO के अनुसार, यह आईपीओ ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में लाया जाएगा और यह बाजार की स्थितियों और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा। इससे पहले Indian Energy Exchange (IEX) ने भी IGX के आईपीओ प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ के बाद IGX को और अधिक निवेश मिलेगा और यह भारत के ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
कुल मिलाकर, IGX का पूंजी बाजार में प्रवेश और नए डेरिवेटिव्स की शुरुआत भारत के नेचुरल गैस ट्रेडिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में पारदर्शिता और तरलता (liquidity) दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

