नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) को बड़ी राहत देते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने एम्पायर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (ETSL) की दिवाला याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका लगभग 7.09 करोड़ रुपये के कथित परिचालन बकाये की वसूली को लेकर दायर की गई थी। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि यह मामला दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की धारा 9 के तहत “कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया” शुरू करने योग्य नहीं है, क्योंकि यह वास्तविक वित्तीय डिफॉल्ट से अधिक अनुबंधीय विवाद का मामला प्रतीत होता है।
National Company Law Tribunal की इलाहाबाद पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों पक्षों के बीच सेवा गुणवत्ता, अनुबंध के पालन और भुगतान में कटौती जैसे मुद्दों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इसी कारण इस मामले को IBC के तहत दिवाला कार्यवाही में परिवर्तित करना उचित नहीं माना गया।
यह विवाद 2016 में हुए एक ‘बस ऑपरेटर’ समझौते से जुड़ा है, जो Noida Metro Rail Corporation और एम्पायर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के बीच हुआ था। समझौते के तहत ETSL को नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच 100 लो-फ्लोर एसी सीएनजी बसों का संचालन करना था। हालांकि, कंपनी ने आरोप लगाया कि उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और वह केवल 50 बसें ही सेवा में लगा सकी।
ETSL का दावा है कि उसने बाद में कई बार अतिरिक्त बस संचालन के लिए NMRC से संपर्क किया, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके साथ ही कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच उसके द्वारा प्रस्तुत कई बिलों का भुगतान नहीं किया गया, जिससे कुल बकाया लगभग 7.09 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
समझौते के अनुसार भुगतान प्रक्रिया में स्पष्ट समयसीमा तय थी, जिसके तहत बिल प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर 50 प्रतिशत भुगतान और 15 दिनों के भीतर शेष भुगतान किया जाना था। अनुबंध में यह भी प्रावधान था कि देरी की स्थिति में प्रतिदिन 9 प्रतिशत की चक्रवृद्धि ब्याज दर लागू होगी। ETSL ने इसी आधार पर IBC की धारा 8 के तहत नोटिस जारी कर इसे ‘डिफॉल्ट’ करार देते हुए दिवाला याचिका दायर की थी।
दूसरी ओर, NMRC ने अदालत में दलील दी कि कोई वास्तविक भुगतान चूक नहीं हुई है। निगम की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि ETSL ने अनुबंध के अनुरूप सेवाएं प्रदान नहीं कीं और कई उल्लंघन किए, जिनके चलते कई कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे। यह भी बताया गया कि पहले इस विवाद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी, जिसे 2021 में खारिज कर दिया गया था। इसके बाद मामले को मध्यस्थता प्रक्रिया में भी ले जाया गया था।
सभी पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद NCLT ने निष्कर्ष निकाला कि यह मामला वास्तविक दिवाला डिफॉल्ट नहीं, बल्कि अनुबंधीय विवाद है, जिसे IBC के तहत आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इसके चलते ETSL की याचिका खारिज कर दी गई और NMRC को राहत मिल गई।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं से जुड़े अनुबंध विवादों में IBC के उपयोग को लेकर कानूनी व्याख्याएं लगातार विकसित हो रही हैं।

