16 Oct 2026, Fri

Jio की शुरुआत से लेकर रिलायंस के कर्ज मुक्त होने तक, IPO मीट में ईशा अंबानी ने बताई कंपनी की कहानी

नई दिल्ली: भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाली जियो की शुरुआत के पीछे एक दिलचस्प घटना रही है। कंपनी की डायरेक्टर ईशा अंबानी ने आईपीओ से जुड़ी मीडिया मीट के दौरान कंपनी के शुरुआती विचार, कारोबार बढ़ाने की रणनीति और रिलायंस के सफर से जुड़े कई अहम पहलुओं का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में इंटरनेट कनेक्शन से जुड़ी एक छोटी-सी परेशानी ने भारत में बेहतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के विचार को जन्म दिया था।

कॉलेज के असाइनमेंट से आया डिजिटल कंपनी बनाने का विचार

ईशा अंबानी के मुताबिक, साल 2009-2010 के आसपास वह और उनके भाई आकाश अंबानी कॉलेज की छुट्टियों में मुंबई लौटे थे। उस दौरान ईशा को अपना एक असाइनमेंट ऑनलाइन जमा करना था, लेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या के कारण वह ऐसा नहीं कर पाईं।

इस अनुभव के बाद दोनों भाई-बहन ने भारत में इंटरनेट की उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता को लेकर चर्चा की। उन्होंने महसूस किया कि देश में डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की बड़ी जरूरत है। इसी बातचीत के दौरान आकाश अंबानी ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी बनाने का विचार रखा, जो लोगों को बेहतर डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध करा सके।

आगे चलकर यही विचार एक बड़े कारोबारी प्रोजेक्ट में बदला और साल 2016 में जियो की सेवाएं शुरू हुईं। कंपनी ने किफायती डेटा और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार के जरिए भारतीय टेलीकॉम बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

कारोबार बढ़ाने के लिए तीन अहम सिद्धांत

ईशा अंबानी ने रिलायंस की कारोबारी रणनीति के तीन प्रमुख सिद्धांतों पर भी बात की। इनमें लंबी अवधि की सोच, बड़े स्तर पर कारोबार का विस्तार और योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना शामिल है।

उन्होंने बताया कि कंपनी केवल तात्कालिक मुनाफे को ध्यान में रखकर फैसले नहीं लेती, बल्कि आने वाले वर्षों और दशकों की जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार करती है। बड़े स्तर पर कारोबार करने से लागत को बेहतर तरीके से संभालने और परिचालन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

ईशा के अनुसार, मजबूत तकनीकी क्षमता और योजनाओं को जमीन पर उतारने की प्रभावी व्यवस्था कंपनी के विकास में अहम भूमिका निभाती है।

तय समय से पहले कर्ज मुक्त हुई रिलायंस

ईशा अंबानी ने रिलायंस के वित्तीय सफर का जिक्र करते हुए बताया कि साल 2019 में कंपनी ने 2021 तक नेट डेट-फ्री बनने का लक्ष्य रखा था। कोरोना महामारी और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने यह लक्ष्य निर्धारित समय से नौ महीने पहले हासिल कर लिया।

उन्होंने कहा कि शेयरधारकों से किए गए वादों को पूरा करना कंपनी की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मजबूत बैलेंस शीट बनाए रखना और कारोबार से लगातार नकदी पैदा करना भी इसकी रणनीति में शामिल है।

धीरूभाई अंबानी की विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी

ईशा ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी की विरासत को याद करते हुए बताया कि उन्होंने 1977 में रिलायंस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराया था। कंपनी के लंबे सफर में शेयरधारकों की भागीदारी और विकास को महत्वपूर्ण स्थान मिला है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी का लक्ष्य कंपनी के विकास के साथ देश की आर्थिक प्रगति में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। ईशा, आकाश और अनंत अंबानी कंपनी की दीर्घकालिक सोच और विकास की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

जियो के प्रस्तावित आईपीओ के बीच कंपनी की यह कहानी बताती है कि एक छोटी-सी समस्या से निकला विचार किस तरह बड़े कारोबारी अवसर में बदल सकता है। अब कंपनी की नजर डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और भविष्य में नई तकनीकी सेवाओं के विकास पर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *