Iran-US War Timeline: हमलों से लेकर सीजफायर तक, 40 दिनों में क्या-क्या हुआ?
मिडिल ईस्ट में हालिया संघर्ष ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। Iran और United States के बीच शुरू हुआ यह युद्ध अब 2 हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) तक पहुंच चुका है। आइए जानते हैं 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक इस युद्ध की पूरी कहानी।
28 फरवरी: युद्ध की शुरुआत
इस संघर्ष की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व में चलाए गए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” से हुई। अमेरिका और Israel ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए।
पहले 12 घंटों में ही करीब 900 हमले किए गए, जिनमें ईरान की मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस सिस्टम और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei समेत कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए।
ईरान का जबरदस्त जवाब
इस हमले के बाद ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू की। ईरान ने इजरायल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके सहयोगी देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और हजारों ड्रोन दागे।
इससे पूरे मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़ गए और Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई। इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ा और दुनियाभर में तेल-गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गईं।
मार्च: मिडिल ईस्ट में तबाही
मार्च के दौरान यह युद्ध और फैल गया। ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर लगातार हमले किए। इसके जवाब में अमेरिका और इजरायल ने भी ईरान के सैन्य और ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया।
इस दौरान हजारों लोगों की मौत हुई, लाखों लोग विस्थापित हुए और कई शहर खंडहर में बदल गए। यह संघर्ष एक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका था।
दोनों पक्षों को भारी नुकसान
युद्ध के दौरान दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। जहां अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और सैन्य ढांचे को तबाह किया, वहीं ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया।
फाइटर जेट, ड्रोन और कई सैन्य उपकरण नष्ट हुए। इस संघर्ष ने यह साफ कर दिया कि युद्ध किसी के लिए भी आसान नहीं था।
ट्रंप के विवादित बयान
इस पूरे युद्ध के दौरान Donald Trump लगातार बयान देते रहे। कभी उन्होंने युद्ध जल्द खत्म होने का दावा किया, तो कभी ईरान को सख्त चेतावनी दी।
उन्होंने कई बार ईरान को अल्टीमेटम दिया और यहां तक कहा कि अगर शर्तें नहीं मानी गईं तो “सभ्यता मिटा देंगे”। इन बयानों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना भी हुई।
होर्मुज पर संकट
युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई प्रभावित हुई। अमेरिका के प्रयासों के बावजूद इसे खुलवाना संभव नहीं हो सका।
इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा और कई देशों में ईंधन संकट गहराने लगा।
8 अप्रैल: सीजफायर का ऐलान
लगातार बढ़ते तनाव और नुकसान के बीच आखिरकार 8 अप्रैल को अमेरिका ने 2 हफ्तों के सीजफायर का ऐलान किया। ट्रंप ने कहा कि यह फैसला कूटनीतिक प्रयासों के तहत लिया गया है।
ईरान ने भी इस पर सहमति जताई, लेकिन अपनी 10 शर्तों के साथ। दोनों देशों ने इस समझौते को अपनी-अपनी जीत बताया।
निष्कर्ष
करीब 40 दिनों तक चले इस युद्ध ने मिडिल ईस्ट को गहरे जख्म दिए हैं। हालांकि फिलहाल सीजफायर से राहत मिली है, लेकिन स्थायी शांति अभी भी अनिश्चित है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह युद्धविराम स्थायी समाधान में बदलता है या फिर एक बार फिर संघर्ष भड़क उठता है।

