Iran-US Peace Deal Live: होर्मुज विवाद और ट्रंप-ईरान तनाव के बीच कूटनीति तेज, वैश्विक तेल बाजार पर संकट गहराया
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण हालात के बीच एक बार फिर कूटनीतिक और बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि ट्रंप के सभी सात दावे “एक घंटे के भीतर झूठे साबित हुए” हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अमेरिका की ओर से नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहती है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद किया जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान का कहना है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही उसकी अनुमति पर निर्भर करेगी। वहीं अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में ईरान को टोल वसूलने या प्रतिबंध लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रंप की चेतावनी और कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि बुधवार तक कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो जाता, अमेरिका अपनी नौसैनिक उपस्थिति होर्मुज क्षेत्र में बनाए रखेगा।
ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी खुश हैं और इस मुद्दे पर उनकी आगामी चीन यात्रा “ऐतिहासिक” हो सकती है। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान की सख्त प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्री और संसद के स्पीकर ने अमेरिका की नीतियों पर कड़ा रुख अपनाया है। ईरान का कहना है कि यदि अमेरिकी नाकाबंदी जारी रही, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने पर मजबूर होगा। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से भी हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि उस पर किए गए हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं और वैश्विक समुदाय को इस पर सख्त प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने संयुक्त राष्ट्र अधिकारी से मुलाकात में कहा कि ईरान पर हुए हमले “एकतरफा और गैरकानूनी” हैं और इनके खिलाफ वैश्विक स्तर पर कार्रवाई जरूरी है।
वार्ता और कूटनीतिक प्रयास
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की वार्ता इस्लामाबाद में होने की संभावना है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि अमेरिका की ओर से इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों पक्ष समझौते के करीब हैं, लेकिन ईरान ने उनके कई बयानों पर संदेह जताया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें असंतुलित हैं और मौजूदा स्थिति में किसी भी जल्दबाजी में समझौता संभव नहीं है।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
विश्लेषकों के अनुसार, ईरान में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर डाला है। ऊर्जा विश्लेषण फर्म Kpler के अनुसार, इस संकट के कारण वैश्विक बाजार से लगभग 50 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसे आधुनिक इतिहास में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक माना जा रहा है।
शुक्रवार को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से केवल सीमित जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है।
निष्कर्ष
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों की सख्त बयानबाजी और सैन्य चेतावनियों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में होने वाली वार्ताएं इस संकट की दिशा तय कर सकती हैं, लेकिन फिलहाल वैश्विक बाजार और कूटनीतिक हलकों में अनिश्चितता बनी हुई है।

