27 Oct 2026, Tue

IIT बॉम्बे से निकले, सॉफ्टवेयर कंपनी में किया काम, फिर बना दी 2000 करोड़ी ‘दंगल’, अब ‘रामायण’ से इतिहास रचने निकले नितेश तिवारी

मनोरंजन डेस्क: सफलता की राह हमेशा सीधी नहीं होती। कई बार इंसान एक क्षेत्र में पढ़ाई करता है, दूसरे क्षेत्र में नौकरी शुरू करता है और फिर अपनी असली रुचि को पहचानकर बिल्कुल अलग रास्ता चुन लेता है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में भी एक ऐसे निर्देशक हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया, लेकिन रचनात्मकता के प्रति अपने लगाव के चलते फिल्ममेकिंग की दुनिया में कदम रखा। आज वह अपनी शानदार कहानियों और बड़े बजट की फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान विकसित हुई रचनात्मक सोच

मध्य प्रदेश में जन्मे इस फिल्ममेकर ने देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उनकी दिलचस्पी रचनात्मक गतिविधियों में बढ़ने लगी थी। कॉलेज के दिनों में आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं, नाटकों और दूसरी गतिविधियों ने उनकी कल्पनाशीलता को नया आयाम दिया।

उन्हें हमेशा कुछ नया करने और सामान्य सोच से हटकर विचार प्रस्तुत करने में दिलचस्पी रहती थी। इसी दौरान उन्होंने लेखन की शुरुआत की और नाटक, एकांकी तथा मोनो एक्टिंग के लिए रचनाएं तैयार करनी शुरू कीं। धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि कहानियां लिखना और लोगों तक अपने विचार पहुंचाना उन्हें खुशी देता है।

हालांकि, उस समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनकी यही रुचि भविष्य में उन्हें फिल्म निर्देशन की दुनिया तक पहुंचा देगी।

पढ़ाई के बाद सॉफ्टवेयर कंपनी में की नौकरी

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम करना शुरू किया। उन्होंने करीब चार महीने तक इस क्षेत्र में नौकरी की, लेकिन जल्द ही उन्हें महसूस हुआ कि यह काम उनकी रचनात्मक रुचि के अनुरूप नहीं है।

वह ऐसा करियर चाहते थे, जिसमें नए विचारों के साथ प्रयोग करने और अपनी कल्पनाशीलता को व्यक्त करने का अवसर मिले। इसी सोच के चलते उन्होंने पारंपरिक करियर से अलग रास्ता चुनने का फैसला किया।

विज्ञापन की दुनिया से सीखा कहानी कहने का हुनर

सॉफ्टवेयर क्षेत्र छोड़ने के बाद उन्होंने विज्ञापन की दुनिया में कदम रखा। यहां उन्हें कम समय में प्रभावशाली विचार प्रस्तुत करने, दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने और भावनाओं के जरिए लोगों से जुड़ने का अनुभव मिला।

विज्ञापन के क्षेत्र में काम करने से उनकी कहानी कहने की क्षमता मजबूत हुई। यही अनुभव आगे चलकर फिल्म निर्देशन में उनके लिए उपयोगी साबित हुआ। उन्होंने अपनी रचनात्मक सोच और मेहनत के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाई।

फिल्मों ने दिलाई खास पहचान

फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में आने के बाद उन्होंने ऐसी कहानियों पर काम किया, जिनमें भावनाओं, रिश्तों, संघर्ष और सामाजिक संदेश को प्रमुखता दी गई। उनकी एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ने दुनियाभर में शानदार कमाई की और भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में अपनी जगह बनाई। इसके बाद कॉलेज जीवन, दोस्ती और असफलता से उबरने पर आधारित एक अन्य फिल्म को भी दर्शकों का अच्छा समर्थन मिला।

अब बड़े पौराणिक प्रोजेक्ट पर नजरें

इन सफलताओं के बाद अब यह निर्देशक एक भव्य पौराणिक फिल्म के जरिए भारतीय संस्कृति और महाकाव्य की कहानी को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं। इस प्रोजेक्ट में कई बड़े सितारे नजर आने वाले हैं और दर्शकों को इससे काफी उम्मीदें हैं।

उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि करियर की शुरुआत चाहे किसी भी क्षेत्र से हो, अपनी रुचि को पहचानकर लगातार मेहनत करने से नई संभावनाओं के दरवाजे खुल सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *