RBI Report: FY2027 में कच्चा तेल $85 प्रति बैरल और रुपया 94 प्रति डॉलर रहने का अनुमान, बढ़ सकती हैं आर्थिक चुनौतियां
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर Reserve Bank of India (RBI) ने अहम अनुमान जारी किए हैं, जो आने वाले वर्षों में महंगाई, चालू खाता घाटा और मौद्रिक नीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। केंद्रीय बैंक की ताजा मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY2027) में कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि भारतीय रुपया लगभग 94 प्रति डॉलर के स्तर पर रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का अनुमान
RBI ने अपने आकलन में कहा है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से ऊंचाई पर बनी रह सकती हैं। FY2026 की दूसरी छमाही में जहां तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं FY2027 के लिए इसे बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, OPEC+ द्वारा सप्लाई बढ़ाने के फैसले के चलते 2025 के अंत में तेल की कीमतों में गिरावट आई थी और यह 63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। लेकिन मार्च 2026 में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से कीमतें अचानक उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं।
रुपये पर लगातार दबाव
भारतीय मुद्रा की बात करें तो FY2026 में रुपये ने पिछले 14 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की है। डॉलर के मुकाबले रुपया 9.88% तक कमजोर हुआ, जो FY2012 के बाद सबसे बड़ा वार्षिक नुकसान है।
अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच रुपया 87 से 92 प्रति डॉलर के बीच बना रहा, लेकिन बाद में इसमें तेजी से गिरावट आई। मार्च 2026 में तो यह इंट्राडे में 95 प्रति डॉलर के स्तर को भी पार कर गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की निकासी, डॉलर की मजबूत मांग और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती इसके मुख्य कारण रहे हैं। साथ ही पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भी रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
FY2027 और FY2028 के लिए संकेत
RBI ने FY2027 के लिए 85 डॉलर प्रति बैरल और FY2028 के लिए 75 डॉलर प्रति बैरल का बेसलाइन अनुमान रखा है। यह आकलन ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स के औसत के आधार पर किया गया है।
रुपये का अनुमान 94 प्रति डॉलर रखा गया है, जो पहले के 88 प्रति डॉलर के अनुमान से काफी कमजोर है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में आयात महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई पर असर पड़ सकता है।
अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर पड़ता है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और ट्रांसपोर्ट लागत में इजाफा हो सकता है, जो महंगाई को बढ़ावा देता है।
वहीं कमजोर रुपया आयात को महंगा और निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाता है, लेकिन इससे विदेशी कर्ज और चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा भी रहता है।
निष्कर्ष
RBI की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि आने वाला समय आर्थिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर रुपया मिलकर महंगाई और आर्थिक संतुलन पर दबाव बना सकते हैं। ऐसे में सरकार और केंद्रीय बैंक को संतुलित नीतियों के जरिए आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की जरूरत होगी।

