महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में बड़ा कदम: संसद में तीन अहम विधेयक पेश, बदलेगा लोकसभा का गणित
नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार ने गुरुवार को तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए, जिनका उद्देश्य 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरी तरह लागू करना है। इन विधेयकों में संविधान (संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य 2029 से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना है।
इन विधेयकों के पारित होने के बाद देश की राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे अहम प्रस्ताव लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का है। वर्तमान में 543 सीटों वाली लोकसभा को बढ़ाकर लगभग 850 सीटों तक करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।
सरकार का मानना है कि सीटों की संख्या बढ़ाए बिना महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा। इसलिए परिसीमन प्रक्रिया के जरिए नए सिरे से सीटों का निर्धारण किया जाएगा। प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के तहत एक नया परिसीमन आयोग गठित किया जाएगा, जो जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करेगा।
हालांकि, यही मुद्दा राजनीतिक विवाद का कारण भी बन गया है। विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए भी परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि परिसीमन 2026 की नई जनगणना के आधार पर होना चाहिए, न कि 2011 के आंकड़ों के आधार पर। दक्षिण भारत के कई राज्य—जैसे तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना—भी आशंका जता रहे हैं कि नए परिसीमन से उनकी सीटों का अनुपात प्रभावित हो सकता है।
सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए भरोसा दिलाया है कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। प्रस्तावित फार्मूले के अनुसार, सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
राजनीतिक गणित की बात करें तो इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, क्योंकि यह संविधान संशोधन से जुड़ा मामला है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, सत्तारूढ़ गठबंधन के पास यह संख्या नहीं है, इसलिए उसे विपक्ष के सहयोग की जरूरत पड़ेगी। यह स्थिति आने वाले दिनों में संसद में व्यापक बहस और राजनीतिक रणनीति को जन्म दे सकती है।
इन प्रस्तावों के लागू होने के बाद देश की लोकतांत्रिक संरचना में चार बड़े बदलाव संभव हैं—महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण, लोकसभा सीटों में बड़ा इजाफा, निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन और एक नए परिसीमन आयोग का गठन।
कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को ऐतिहासिक स्तर तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। हालांकि, इसके साथ जुड़े संवैधानिक, राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन के मुद्दे आने वाले समय में इसकी दिशा तय करेंगे।

