20 May 2026, Wed

EXPLAINER: बांग्लादेश-नेपाल के बीच मौजूद सिलिगुड़ी कॉरिडोर की 120 एकड़ जमीन क्यों है इतनी अहम? जिसके कागज आज खुद BSF को सौंपेंगे CM शुभेंदु, समझें पूरी बात

पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने शपथ लेने के कुछ ही दिनों के भीतर एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लेते हुए सिलिगुड़ी कॉरिडोर की 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को सौंपने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari आज स्वयं सिलिगुड़ी जाकर इस जमीन के दस्तावेज सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपेंगे।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार लंबे समय से इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और सुरक्षा परियोजनाओं के लिए जमीन की मांग कर रही थी, लेकिन पूर्व सरकार के दौरान यह मामला लगातार लंबित रहा।

शपथ के 10 दिन के भीतर बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को पद की शपथ ली थी और महज 10 दिनों के भीतर उन्होंने इस अहम फैसले को मंजूरी दे दी। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग के सात हिस्सों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) को सौंपने की अनुमति भी दे दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय का संकेत है।

क्या है सिलिगुड़ी कॉरिडोर?

Siliguri Corridor को अक्सर “चिकन नेक” भी कहा जाता है। यह भारत का बेहद संकरा भूभाग है, जो उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई कुछ स्थानों पर केवल 20 से 22 किलोमीटर तक रह जाती है।

यह इलाका रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से भारत के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इसके आसपास नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन जैसे देश स्थित हैं।

केंद्र सरकार के लिए क्यों जरूरी थी यह जमीन?

केंद्र सरकार लंबे समय से इस क्षेत्र में सड़क और रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। लेकिन जमीन संबंधी प्रक्रियाओं के कारण कई हाईवे प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं अटकी हुई थीं।

अब इस जमीन के मिलने के बाद सड़क चौड़ीकरण, नई कनेक्टिविटी और रक्षा संबंधी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर सड़क और रेलवे नेटवर्क बनने से सेना और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही अधिक तेज और आसान होगी। खासकर सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों तक पहुंच मजबूत करने में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

सुरक्षा दृष्टि से बड़ा कदम

सिलिगुड़ी कॉरिडोर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी आपात स्थिति में यही मार्ग उत्तर-पूर्वी राज्यों तक सैन्य और जरूरी संसाधनों की सप्लाई सुनिश्चित करता है।

ऐसे में इस क्षेत्र में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

राजनीतिक और रणनीतिक मायने

इस फैसले को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। जहां पहले इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच मतभेद देखने को मिलते थे, वहीं अब नई सरकार के फैसले से रणनीतिक परियोजनाओं को तेजी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

निष्कर्ष

सिलिगुड़ी कॉरिडोर की 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को सौंपना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और उत्तर-पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में सड़क, रेलवे और सुरक्षा ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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