27 Apr 2026, Mon

Explainer: सोने ने कैसे 609 अरब डॉलर के आयात को 1.9 खरब डॉलर के खजाने में कर दिया तब्दील

सोने ने बदली निवेश की परिभाषा: 15 साल में दोगुने से ज्यादा रिटर्न, बना भारतीय परिवारों की सबसे मजबूत संपत्ति

नई दिल्ली: कभी भारतीय अर्थव्यवस्था पर बोझ माने जाने वाला सोना आज देश के सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों में से एक बनकर उभरा है। बीते डेढ़ दशक के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि सोने में निवेश ने न केवल निवेशकों को सुरक्षित रखा, बल्कि उन्हें शानदार रिटर्न भी दिया। साल 2011 से 2025 के बीच सोने की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिला है और लगभग हर साल इसकी वैल्यू कम से कम दोगुनी होती गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में भारत ने करीब 12,670 टन सोना आयात किया, जिस पर लगभग 609 अरब डॉलर खर्च हुए। लेकिन 2026 तक आते-आते यही सोना करीब 1.9 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का हो चुका है। यानी सिर्फ कीमतों में बढ़ोतरी से ही करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर की अतिरिक्त संपत्ति तैयार हुई है। यह आंकड़ा भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार से भी अधिक बताया जा रहा है, जो सोने की ताकत को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने ने पारंपरिक निवेश की धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। पहले इसे निष्क्रिय निवेश माना जाता था, लेकिन अब यह संपत्ति सृजन का सबसे मजबूत माध्यम बन चुका है। खासतौर पर भारतीय परिवारों के लिए, जिन्होंने वर्षों से सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखा है, यह रणनीति बेहद फायदेमंद साबित हुई है।

अगर साल दर साल प्रदर्शन देखें तो तस्वीर और भी साफ हो जाती है। उदाहरण के लिए, 2015 में 35 अरब डॉलर में खरीदा गया सोना आज करीब 157 अरब डॉलर का हो चुका है, यानी लगभग 350 प्रतिशत का फायदा। इसी तरह 2018 में खरीदे गए सोने की कीमत चार गुना तक बढ़ गई है। यहां तक कि 2020 जैसे महामारी वाले साल में भी सोने ने निवेशकों को निराश नहीं किया और उसकी कीमत कई गुना बढ़ गई।

साल 2025 सोने के लिए बेहद खास रहा। इस दौरान गोल्ड प्राइस ने 50 से ज्यादा बार नया रिकॉर्ड बनाया और डॉलर के हिसाब से करीब 67 प्रतिशत का रिटर्न दिया। वहीं भारतीय निवेशकों को रुपये की कमजोरी का भी फायदा मिला और उनका कुल रिटर्न करीब 73 प्रतिशत तक पहुंच गया। इससे साफ है कि सोना बाकी सभी एसेट क्लास से आगे निकल गया।

हालांकि 2026 में सोने की कीमतों में थोड़ी स्थिरता देखने को मिल रही है। विशेषज्ञ इसे गिरावट नहीं बल्कि बाजार का सामान्य संतुलन मानते हैं। उनका कहना है कि बड़ी तेजी के बाद इस तरह का ठहराव सामान्य है और यह निवेशकों के लिए नए मौके भी पैदा करता है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ता आर्थिक असंतुलन, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और महंगाई का दबाव जैसे कई कारण अब भी सोने की कीमतों को समर्थन दे रहे हैं। ऐसे में लंबे समय के निवेशकों के लिए सोना अभी भी एक मजबूत और सुरक्षित विकल्प बना हुआ है।

कुल मिलाकर, सोने ने यह साबित कर दिया है कि सही समय पर किया गया निवेश किस तरह भविष्य में बड़ी संपत्ति में बदल सकता है। यही वजह है कि आज भी निवेशक इसे अपने पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनाए हुए हैं।

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