19 Apr 2026, Sun

Explainer: एनरिच्ड यूरेनियम, Uranium dust क्या है, क्यों अमेरिका इसे ईरान से छीनना चाहता है

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच “यूरेनियम डस्ट” शब्द एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अपना “यूरेनियम डस्ट” अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है। इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और परमाणु सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए समझते हैं कि आखिर यह यूरेनियम डस्ट क्या होता है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है।

दरअसल, यूरेनियम एक प्राकृतिक तत्व है जो पृथ्वी में अयस्क (ore) के रूप में पाया जाता है। इसे खनन और प्रोसेसिंग के बाद एक पाउडर जैसे रूप में बदला जाता है, जिसे आमतौर पर “येलोकेक” कहा जाता है। यही प्रारंभिक रूप कई बार आम भाषा में “यूरेनियम डस्ट” भी कहा जाता है। हालांकि तकनीकी रूप से “यूरेनियम डस्ट” कोई आधिकारिक वैज्ञानिक शब्द नहीं है, बल्कि यह यूरेनियम के बारीक कणों या पाउडरनुमा अवस्था को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

प्राकृतिक यूरेनियम में मुख्य रूप से दो आइसोटोप होते हैं—यू-238 (लगभग 99%) और यू-235 (करीब 0.7%)। परमाणु ऊर्जा या हथियारों के लिए उपयोगी यू-235 की मात्रा बढ़ाने के लिए यूरेनियम को “एनरिच” यानी संवर्धित किया जाता है। इस प्रक्रिया में यूरेनियम को पहले गैस (यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड या UF6) में बदला जाता है और फिर सेंट्रीफ्यूज मशीनों में घुमाकर हल्के और भारी कणों को अलग किया जाता है।

अमेरिका और इजरायल का आरोप है कि ईरान के पास 60% तक संवर्धित यूरेनियम का बड़ा भंडार है, जो परमाणु हथियार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य केवल ऊर्जा उत्पादन है।

IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) की निगरानी में दुनिया भर के देशों के परमाणु कार्यक्रमों पर नजर रखी जाती है। एजेंसी के अनुसार, अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (लगभग 90% या उससे अधिक U-235) को “वेपन-ग्रेड” माना जाता है, जिससे परमाणु बम बनाया जा सकता है।

यूरेनियम डस्ट या पाउडर का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह संवर्धन प्रक्रिया के शुरुआती या मध्य चरणों का हिस्सा हो सकता है। यदि इसे आगे प्रोसेस किया जाए, तो यही सामग्री परमाणु ईंधन या हथियार में बदल सकती है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि केवल “डस्ट” या पाउडर अपने आप में हथियार नहीं होता—इसके लिए जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम को सुरक्षित रूप से संभालना बेहद जरूरी है क्योंकि यह रेडियोधर्मी होता है और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए इसे सीलबंद कंटेनरों में रखा जाता है और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नियंत्रित किया जाता है।

कुल मिलाकर, “यूरेनियम डस्ट” एक सामान्य शब्द है जो यूरेनियम के पाउडर या प्रारंभिक रूप को दर्शाता है, लेकिन इसके पीछे की तकनीक और राजनीति बेहद जटिल है। यही कारण है कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच यह मुद्दा वैश्विक सुरक्षा का केंद्र बना हुआ है।

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