9 Sep 2026, Wed

Exclusive: ‘घमासान’ में STF चीफ बनने में छूटे पसीने, प्रतीक गांधी ने बताया सबसे बड़ा चैलेंज, बोले- पहले कभी ऐसा रोल नहीं किया

अभिनेता प्रतीक गांधी अपनी अलग-अलग भूमिकाओं में प्रयोग करने के लिए पहचाने जाते हैं। अब वह फिल्म ‘घमासान’ में एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाते नजर आएंगे, जो उनके अब तक के किरदारों से काफी अलग है। फिल्म में प्रतीक गांधी STF चीफ की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इस किरदार, शूटिंग के अनुभव और फिल्म की कहानी को लेकर खुलकर बातचीत की है।

अभिनेता के मुताबिक, ‘घमासान’ में उनका किरदार सामान्य फिल्मी पुलिस अधिकारी जैसा नहीं है। कहानी देश के हार्टलैंड यानी ग्रामीण और जमीन से जुड़े इलाकों की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। ऐसे माहौल में पुलिस व्यवस्था, वहां की भाषा, संस्कृति और लोगों के व्यवहार को काफी वास्तविक तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि इस भूमिका को निभाना उनके लिए एक नई चुनौती साबित हुआ।

पहले भी निभा चुके हैं पुलिस अधिकारी का किरदार

प्रतीक गांधी इससे पहले भी पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा चुके हैं। हालांकि, उनका कहना है कि ‘घमासान’ का STF चीफ उनके पिछले किरदार से बिल्कुल अलग है। इस भूमिका में सिर्फ पुलिस अधिकारी के संवाद बोलना या वर्दी पहनना ही काफी नहीं था, बल्कि किरदार की पूरी सोच और व्यक्तित्व को पर्दे पर विश्वसनीय बनाना जरूरी था।

उनके मुताबिक, STF चीफ की जिम्मेदारी काफी बड़ी होती है। उसे अपनी टीम का नेतृत्व करने के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों में तुरंत फैसले लेने पड़ते हैं। इसलिए किरदार को समझने के दौरान उन्होंने उसके अनुशासन, व्यवहार और काम करने के तरीके की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया।

बॉडी लैंग्वेज बनी सबसे बड़ी चुनौती

प्रतीक गांधी ने बताया कि इस किरदार को निभाते समय सबसे बड़ी चुनौती उसकी फिजिकलिटी और बॉडी लैंग्वेज को सही तरीके से पकड़ना था। एक STF अधिकारी किस तरह खड़ा होता है, अपनी टीम से किस अंदाज में बात करता है, तनावपूर्ण परिस्थितियों में उसका व्यवहार कैसा रहता है और वह अपने आसपास के लोगों पर किस तरह प्रभाव डालता है, इन सभी पहलुओं को पर्दे पर उतारना उनके लिए महत्वपूर्ण था।

अभिनेता के अनुसार, किसी पुलिस अधिकारी की भूमिका को सिर्फ संवादों के जरिए प्रभावी नहीं बनाया जा सकता। उसके व्यक्तित्व और बॉडी लैंग्वेज में भी जिम्मेदारी और नेतृत्व की झलक दिखाई देनी चाहिए। इसी वजह से उन्होंने किरदार के डेमीनर पर खास मेहनत की।

हार्टलैंड की कहानी से जुड़ी है फिल्म

‘घमासान’ की कहानी देश के उन इलाकों की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है, जहां स्थानीय भाषा और संस्कृति कहानी का अहम हिस्सा है। फिल्म में वास्तविक लोकेशन और स्थानीय माहौल को प्रमुखता दी गई है। इससे कहानी को अधिक स्वाभाविक और जमीन से जुड़ा बनाने की कोशिश की गई है।

प्रतीक गांधी का मानना है कि फिल्म की कहानी आज के समय से जुड़ी हुई है और इसमें दिखाया गया माहौल दर्शकों को वास्तविक दुनिया के करीब महसूस होगा। STF चीफ के किरदार के जरिए पुलिस व्यवस्था और जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों को भी कहानी में प्रमुखता दी गई है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रतीक गांधी इस चुनौतीपूर्ण भूमिका को पर्दे पर किस तरह पेश करते हैं और ‘घमासान’ की कहानी दर्शकों के बीच कितना प्रभाव छोड़ पाती है।

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