नई दिल्ली: India के खिलाफ संभावित सैन्य रणनीति को लेकर Pakistan की गतिविधियों पर नई जानकारी सामने आई है। खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान सीमा से सटे कुछ क्षेत्रों में अपनी सैन्य तैनाती को पुनर्गठित कर रहा है और संवेदनशील प्रतिष्ठानों को रिहायशी इलाकों के भीतर स्थानांतरित कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने सियालकोट, शकरगढ़ और आसपास के इलाकों में एयर डिफेंस यूनिट्स, आर्टिलरी गन और अन्य सैन्य उपकरणों की तैनाती बढ़ा दी है। इनमें कुछ स्थानों पर नागरिक आबादी के बीच सैन्य ढांचे को रखने की रणनीति अपनाई जा रही है, जिसे सुरक्षा विशेषज्ञ “ह्यूमन शील्ड” रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। इसका उद्देश्य कथित तौर पर किसी भी संभावित जवाबी कार्रवाई की स्थिति में सैन्य परिसंपत्तियों को सीधे हमलों से बचाना बताया जा रहा है।
Sialkot के आसपास के क्षेत्रों में भी सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां एयर डिफेंस सिस्टम और निगरानी उपकरणों की तैनाती को मजबूत किया गया है। इसके साथ ही कुछ अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है।
खुफिया इनपुट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान इन इलाकों में ड्रोन आधारित निगरानी और सर्विलांस सिस्टम को सक्रिय करने की तैयारी कर रहा है। इससे सीमा पार गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित रणनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिशों की आशंका जताई जा रही है।
जानकारों का मानना है कि रिहायशी इलाकों के भीतर सैन्य उपकरणों की तैनाती से स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को खतरा बढ़ सकता है। यदि किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई होती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ने की संभावना रहती है। इसी कारण इस रणनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा सकती है।
हालांकि, अब तक पाकिस्तान या भारत सरकार की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह जानकारी मुख्य रूप से खुफिया सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पर किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि बढ़ने पर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।
इस बीच, भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी सीमा पर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए निगरानी और सुरक्षा तंत्र को सक्रिय रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में दोनों देशों के बीच संयम और कूटनीतिक संवाद बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।

