9 Jun 2026, Tue

E85 Fuel: पेट्रोल से 20 रुपये सस्ता! पर क्या आपकी गाड़ी में डल सकता है यह फ्यूल? टैंक फुल कराने से पहले पढ़ लें ये खबर

नई दिल्ली: देश में बढ़ती पेट्रोल कीमतों, प्रदूषण और विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने हाल ही में दिल्ली में E85 फ्यूल लॉन्च किया है। यह नया ईंधन पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जा रहा है। हालांकि, इसे लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसे हर कार और बाइक में इस्तेमाल किया जा सकता है?

क्या है E85 फ्यूल?

E85 एक हाई एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल है, जिसमें लगभग 80 से 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत के आसपास पेट्रोल का मिश्रण होता है। एथेनॉल एक जैविक ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है ताकि पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

कीमत में बड़ा अंतर

E85 फ्यूल की शुरुआती कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर रखी गई है। वहीं, कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में E85 सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता साबित हो सकता है। यदि इसका उपयोग बड़े स्तर पर शुरू होता है, तो वाहन मालिकों के ईंधन खर्च में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

क्या हर वाहन में डल सकता है E85?

विशेषज्ञों के अनुसार, E85 फ्यूल हर वाहन के लिए उपयुक्त नहीं है। यह ईंधन केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex Fuel Vehicles) के लिए तैयार किया गया है। फ्लेक्स-फ्यूल इंजन विशेष तकनीक से लैस होते हैं और E20 से लेकर E100 तक के एथेनॉल मिश्रण पर सुरक्षित रूप से चल सकते हैं।

यदि किसी सामान्य पेट्रोल इंजन वाली कार या बाइक में E85 भर दिया जाए, तो इंजन, फ्यूल पाइप और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी के तकनीकी विनिर्देशों की जांच करने के बाद ही इस ईंधन का उपयोग करना चाहिए।

पर्यावरण के लिए कितना फायदेमंद?

E85 फ्यूल का सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, E85 पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की तुलना में लगभग 61 प्रतिशत तक कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कर सकते हैं। इससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।

ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बल

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग बढ़ने से आयातित तेल पर निर्भरता कम हो सकती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ E85 फ्यूल का उपयोग भी तेजी से बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल इसका लाभ केवल उन्हीं वाहन मालिकों को मिलेगा जिनकी गाड़ियां फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस हैं।

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