7 May 2026, Thu

DIIs ने 4 महीनों में भारतीय शेयर बाजार में झोंक दिए ₹3,00,000 करोड़; विदेशी निवेशक भी रह गए हैरान!

भारतीय शेयर बाजार में DII का बढ़ता दबदबा, विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में साल 2026 के दौरान एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने रिकॉर्ड खरीदारी कर बाजार को मजबूती देने का काम किया है। भारी वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार में लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

DII ने चार महीनों में लगाए 3 लाख करोड़ रुपये

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। यह निवेश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है और विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं।

जनवरी 2026 में DII ने करीब 69,220 करोड़ रुपये का निवेश किया। फरवरी में यह आंकड़ा 39,702 करोड़ रुपये रहा। मार्च में निवेश में जबरदस्त उछाल देखने को मिला और करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये बाजार में लगाए गए। अप्रैल में 43,892 करोड़ रुपये और मई में अब तक 14,204 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 में अब तक FII करीब 2 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। अमेरिका-ईरान-इजरायल तनाव, वैश्विक ब्याज दरों की चिंता और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते विदेशी निवेशक उभरते बाजारों में सतर्क रुख अपना रहे हैं।

हालांकि, घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्यों बढ़ रहा है घरेलू निवेशकों का भरोसा?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय निवेशकों की सोच अब तेजी से बदल रही है। लोग शेयर बाजार को केवल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि लंबी अवधि की संपत्ति बनाने का जरिया मानने लगे हैं।

SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान), NPS और EPFO जैसे माध्यमों से हर महीने बड़ी मात्रा में पैसा बाजार में आ रहा है। यही वजह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, बैंक और रिटायरमेंट फंड लगातार भारतीय इक्विटी बाजार में निवेश बढ़ा रहे हैं।

लगातार तीसरे साल रिकॉर्ड निवेश

यह पहली बार नहीं है जब DII ने बाजार में इतनी बड़ी खरीदारी की हो। साल 2025 में DII ने रिकॉर्ड 7.75 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो किसी भी एक साल का सबसे बड़ा आंकड़ा माना गया। वहीं 2024 में घरेलू निवेशकों ने 5.23 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था।

इसके मुकाबले 2022 में यह आंकड़ा 2.76 लाख करोड़ और 2023 में 1.82 लाख करोड़ रुपये था। इससे साफ है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निवेशकों की बाजार में हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

फिर भी क्यों गिर रहे हैं बाजार?

दिलचस्प बात यह है कि भारी घरेलू निवेश के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में दबाव बना हुआ है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही 2026 में अब तक लगभग 8.5 प्रतिशत तक नीचे आ चुके हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका प्रमुख कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI), PMS तथा AIF फंड्स की कमजोर भागीदारी है।

निष्कर्ष

भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों का बढ़ता प्रभाव यह दिखाता है कि अब बाजार केवल विदेशी निवेश पर निर्भर नहीं रहा। DII की मजबूत खरीदारी ने मौजूदा अस्थिर माहौल में बाजार को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाई है। आने वाले समय में अगर घरेलू निवेश इसी तरह जारी रहा, तो भारतीय बाजार वैश्विक चुनौतियों के बीच भी मजबूती बनाए रख सकता है।

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