चेन्नई: डीएमके नेता और तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक रैली में अभिनेत्री तृषा को लेकर कथित विवादित टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद चेन्नई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, जिसके विरोध में डीएमके कार्यकर्ताओं ने कई जगह प्रदर्शन किए और पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कावेरी जल विवाद जैसे गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को निशाना बना रही है।
कावेरी रैली से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, तंजावुर में कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान उदयनिधि स्टालिन मुख्यमंत्री विजय की आलोचना कर रहे थे। इसी दौरान भीड़ में अभिनेत्री तृषा के खिलाफ नारेबाजी हुई और उदयनिधि की कथित टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई की मांग की।
मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने उदयनिधि को हिरासत में लिया। इसके बाद डीएमके समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और कई स्थानों पर प्रदर्शन किए।
एमके स्टालिन का सरकार पर आरोप
एमके स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकार कावेरी मुद्दे पर अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं और जल संकट जैसे मुद्दों पर सरकार प्रभावी कदम उठाने में असफल रही है।
स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में एक “जोकर कैबिनेट” काम कर रही है और सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उदयनिधि को विधानसभा की कार्यवाही से दूर रखने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई।
तंजावुर ले जाने पर उठाए सवाल
डीएमके प्रमुख ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस को केवल पूछताछ करनी थी तो उदयनिधि को चेन्नई में ही जांच के लिए क्यों नहीं बुलाया गया। उन्हें तंजावुर ले जाने की आवश्यकता क्या थी? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ ऐसी धाराएं लगाई गईं जिनसे कानूनी दबाव बढ़ाया जा सके।
स्टालिन ने कहा कि उदयनिधि विपक्ष के नेता हैं और विधानसभा के महत्वपूर्ण सत्र के दौरान उनकी मौजूदगी जरूरी थी। ऐसे समय में उन्हें हिरासत में लेना लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।
हाईकोर्ट से मिली राहत
इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए निर्देश दिया कि पूछताछ पूरी होने के बाद उदयनिधि स्टालिन को रिहा किया जाए। अदालत में सरकारी पक्ष ने भी कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने का इरादा नहीं है।
हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद डीएमके ने इसे अपनी नैतिक जीत बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि अदालत के आदेश ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक तनाव बढ़ा
उदयनिधि स्टालिन की हिरासत और उसके बाद हुई बयानबाजी ने तमिलनाडु की राजनीति को और अधिक गर्म कर दिया है। एक ओर डीएमके इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं सरकार समर्थक दलों का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और विवादित बयानों पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
अब यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कावेरी विवाद, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, अभिव्यक्ति की सीमा और पुलिस कार्रवाई जैसे कई बड़े सवालों के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तमिलनाडु की राजनीति और अधिक तेज होने की संभावना है।

