16 May 2026, Sat

‘ChatGPT और Gemini जैसे AI का न्यायिक कार्यों में न करें इस्तेमाल’, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का सख्त निर्देश

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: न्यायिक कार्यों में AI के उपयोग पर सख्त निर्देश

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। बढ़ते डिजिटल दौर और तकनीकी प्रगति के बीच अदालत ने स्पष्ट किया है कि AI का उपयोग केवल सुधार और सहायक कार्यों के लिए किया जाना चाहिए, न कि न्यायिक तर्क या निर्णय लेने की प्रक्रिया में।

कोर्ट के निर्देश के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों को फैसला लिखने, कानूनी शोध करने और किसी भी प्रकार के न्यायिक विश्लेषण के लिए AI प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करना चाहिए। इस आदेश के तहत ChatGPT, Google Gemini और Microsoft Copilot जैसे लोकप्रिय AI टूल्स के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है।

यह निर्देश पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को महापंजीयक (रजिस्ट्रार-जनरल) द्वारा सोमवार को भेजे गए पत्र के माध्यम से जारी किया गया। पत्र में बताया गया कि मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार सभी न्यायिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे AI टूल्स का उपयोग किसी भी न्यायिक प्रक्रिया में न करें।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस निर्देश का उल्लंघन गंभीर माना जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को बनाए रखना है, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी गलती या पक्षपातपूर्ण जानकारी का असर न्यायिक निर्णयों पर न पड़े।

इससे पहले, गुजरात हाई कोर्ट ने भी AI के इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख अपनाया था। गुजरात हाई कोर्ट ने किसी भी प्रकार के निर्णय लेने, न्यायिक तर्क तैयार करने, आदेशों का ड्राफ्ट बनाने, जमानत या सजा पर विचार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में AI के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।

गुजरात हाई कोर्ट की एआई नीति के अनुसार, AI का उपयोग केवल न्याय वितरण की गति और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन यह न्यायिक निर्णयों या तर्क का विकल्प नहीं बन सकता। इसका मतलब है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल सहायक उपकरण के रूप में होना चाहिए, न कि निर्णायक भूमिका में।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI तेजी से डेटा विश्लेषण और जानकारी जुटाने में मदद कर सकता है, लेकिन न्यायिक निर्णयों में मानवीय समझ, अनुभव और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है, जिसे AI पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं कर सकता। इसी कारण न्यायपालिका ने AI के सीमित और नियंत्रित उपयोग पर जोर दिया है।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का यह फैसला इस बात का संकेत है कि भारत की न्यायिक प्रणाली तकनीकी प्रगति को स्वीकार तो कर रही है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इंसानी विवेक और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा किसी भी तरह से प्रभावित न हो।

यह कदम न्याय व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिसमें तकनीक का उपयोग तो होगा, लेकिन उसकी सीमाएं स्पष्ट रूप से तय की जाएंगी।

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