अगर आप अपनी बचत को सुरक्षित जगह निवेश करने के साथ उस पर तय रिटर्न हासिल करना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD एक लोकप्रिय विकल्प है। इसमें निवेशक एक निश्चित अवधि के लिए पैसा जमा करता है और अवधि पूरी होने पर ब्याज के साथ रकम वापस मिलती है। बैंक ऑफ बड़ौदा अलग-अलग अवधि की FD पर ग्राहकों को अलग-अलग ब्याज दरों का लाभ दे रहा है। बैंक में 7 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए FD कराई जा सकती है।
7 दिन से 10 साल तक FD की सुविधा
बैंक ऑफ बड़ौदा में ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग अवधि की फिक्स्ड डिपॉजिट चुन सकते हैं। सबसे कम अवधि 7 दिन की है, जबकि अधिकतम 10 साल तक के लिए FD खाता खुलवाया जा सकता है। अलग-अलग अवधि और ग्राहक की श्रेणी के आधार पर ब्याज दर भी अलग होती है।
वर्तमान में बैंक की विभिन्न FD योजनाओं पर सामान्य ग्राहकों के लिए ब्याज दर 3.50 प्रतिशत से लेकर 7.35 प्रतिशत तक बताई गई है। हालांकि, किसी खास अवधि की FD पर मिलने वाला ब्याज उसकी निर्धारित शर्तों के अनुसार तय होता है।
400 दिनों की FD पर कितना ब्याज?
400 दिनों की अवधि वाली FD पर ग्राहकों को खास ब्याज दर का लाभ मिल रहा है। इस अवधि के लिए सामान्य ग्राहकों को 6.25 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जा रहा है। यानी 59 साल तक की उम्र वाले ग्राहक 400 दिनों की FD पर 6.25 प्रतिशत की दर से ब्याज हासिल कर सकते हैं।
FD की अवधि पूरी होने पर ग्राहक को मूलधन के साथ निर्धारित ब्याज प्राप्त होता है। निवेश करने से पहले ब्याज भुगतान और FD से जुड़ी अन्य शर्तों को समझना जरूरी है।
सीनियर सिटीजन को मिलेगा अतिरिक्त ब्याज
वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD पर सामान्य ग्राहकों की तुलना में ज्यादा ब्याज दिया जा रहा है। 60 साल या उससे अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन को 400 दिनों की FD पर 6.75 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है।
वहीं, 80 साल या उससे अधिक उम्र के सुपर सीनियर सिटीजन के लिए ब्याज दर 6.85 प्रतिशत है। इस तरह समान अवधि में वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अतिरिक्त ब्याज का फायदा मिलता है।
400 दिनों की FD में कितना निवेश कर सकते हैं?
400 दिनों की इस FD योजना में ग्राहक अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक निवेश कर सकते हैं। हालांकि, बड़ी रकम निवेश करने से पहले FD की ब्याज दर, समय से पहले निकासी के नियम, टैक्स और अन्य लागू शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
FD में निवेश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें रिटर्न पहले से निर्धारित होता है, इसलिए बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर जमा रकम पर नहीं पड़ता। हालांकि, निवेश का फैसला अपनी वित्तीय जरूरत और लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

