देश की प्रमुख विमानन कंपनी Air India इस समय गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 कंपनी के लिए उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत साबित हुआ, जिसमें एयरलाइन को ₹20,000 करोड़ (करीब 2.4 अरब डॉलर) से अधिक का भारी घाटा उठाना पड़ा। यह नुकसान कंपनी के अपने अनुमान से भी कहीं ज्यादा है, जिससे इसके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कंपनी का कुल घाटा लगभग 220 अरब रुपये रहा। इससे पहले एयर इंडिया ने करीब 1.6 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक निकले। इस स्थिति को देखते हुए अब कंपनी ने अपने शेयरधारकों से अतिरिक्त वित्तीय मदद की मांग की है।
नुकसान के पीछे क्या हैं बड़े कारण?
एयर इंडिया के इस भारी घाटे के पीछे कई अहम वजहें सामने आई हैं। इनमें सबसे बड़ा झटका जून 2025 में हुए एक बड़े विमान हादसे को माना जा रहा है। Boeing 787 Dreamliner से जुड़ा यह हादसा अहमदाबाद के पास हुआ था, जिसमें 240 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद कंपनी को सुरक्षा कारणों से कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करनी पड़ी, जिससे राजस्व पर सीधा असर पड़ा।
इसके अलावा, क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों ने भी एयरलाइन की मुश्किलें बढ़ाईं। पाकिस्तान द्वारा अपना हवाई क्षेत्र बंद करने के कारण एयर इंडिया को अमेरिका और यूरोप के लिए लंबा और महंगा रूट अपनाना पड़ा। वहीं मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण उस क्षेत्र में कंपनी की करीब 16% क्षमता प्रभावित हुई।
ऊपर से जेट ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों ने ऑपरेटिंग लागत को और बढ़ा दिया, जिससे कंपनी का कुल खर्च नियंत्रण से बाहर होता चला गया।
शेयरधारकों से मदद की उम्मीद
इस वित्तीय संकट से उबरने के लिए एयर इंडिया के प्रमुख निवेशकों के साथ बातचीत जारी है। कंपनी के मालिक टाटा ग्रुप और साझेदार Singapore Airlines (जिसकी 25.1% हिस्सेदारी है) से पूंजी निवेश को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि मिलने वाली मदद कंपनी की जरूरत के मुकाबले कम हो सकती है, ऐसे में एयरलाइन को अन्य वित्तीय विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है।
नेतृत्व और सुरक्षा पर भी सवाल
वित्तीय संकट के साथ-साथ कंपनी नेतृत्व की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने इस साल के अंत तक पद छोड़ने का संकेत दिया है, जिससे कंपनी के मैनेजमेंट को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
वहीं, हाल ही में विमानन नियामक के ऑडिट में सुरक्षा मानकों को लेकर एयर इंडिया को खराब रैंकिंग मिली है, जो उसकी साख के लिए एक और बड़ा झटका है।
वैश्विक नीतियों का असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों का भी कंपनी पर असर पड़ा है। व्यापारिक शुल्क और वीजा नियमों में सख्ती के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या और कार्गो बिजनेस प्रभावित हुआ, जिससे एयरलाइन की आमदनी पर दबाव बढ़ा।
आगे की राह
कुल मिलाकर, एयर इंडिया इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है—चाहे वह वित्तीय नुकसान हो, परिचालन लागत, सुरक्षा मानक या नेतृत्व संकट। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी को जल्द ही ठोस रणनीति अपनानी होगी, ताकि वह इस मुश्किल दौर से बाहर निकल सके और भविष्य में स्थिर विकास की ओर बढ़ सके।

