2 Nov 2026, Mon

कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानें अब किस भाव पर चल रहा है कारोबार

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच हालात सुधरने की उम्मीदों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। सोमवार को कच्चे तेल के भाव में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जबकि भारतीय वायदा बाजार में भी कच्चा तेल सस्ता हुआ है। बाजार में इस गिरावट के पीछे राजनयिक बातचीत, संभावित युद्धविराम की उम्मीदें और तेल उत्पादक देशों की उत्पादन नीति जैसे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

MCX पर 3.53 प्रतिशत टूटा कच्चे तेल का भाव

घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 19 नवंबर की डिलीवरी वाला कच्चा तेल 3.53 प्रतिशत की गिरावट के साथ 9,586 रुपये प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। हाल के सप्ताहों में ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद कीमतों में आई इस गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा है।

कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य-पूर्व में संघर्ष समाप्त होने की संभावनाओं से बाजार में अनिश्चितता कुछ कम होने की उम्मीद बनी है। हालांकि, क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

मध्य-पूर्व में बातचीत से बाजार को मिली राहत

कतर और ईरान के अधिकारियों के बीच लगातार तीसरे दिन बातचीत जारी रहने की खबरों से तनाव कम होने की उम्मीद मजबूत हुई है। इस बातचीत का उद्देश्य अमेरिका और इजरायल से जुड़े ईरान के साथ जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए संभावित समझौते की दिशा में आगे बढ़ना बताया जा रहा है।

यदि बातचीत से कोई सकारात्मक नतीजा निकलता है और क्षेत्र में सैन्य तनाव कम होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं घट सकती हैं। इसके विपरीत, बातचीत विफल होने या किसी नए हमले की स्थिति में कीमतों में दोबारा तेजी आने की आशंका बनी रहेगी।

ईरान की चेतावनी से बरकरार है जोखिम

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर नया हमला किया गया, तो वह पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के कारण बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि चुनावों से पहले ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया जाएगा। हालांकि, भविष्य की सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियां तेल की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

OPEC+ ने उत्पादन लक्ष्य बनाए रखने पर जताई सहमति

तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ने दिसंबर तक अपने मौजूदा उत्पादन लक्ष्यों को बनाए रखने पर सहमति जताई है। उत्पादन में बड़े बदलाव नहीं होने की स्थिति में बाजार की दिशा मुख्य रूप से मांग, आपूर्ति और मध्य-पूर्व के घटनाक्रम पर निर्भर रह सकती है।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के लिए तेल आयात की लागत कम होने की संभावना बन सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी का असर पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों पर तुरंत या समान अनुपात में पड़े, यह जरूरी नहीं है। घरेलू ईंधन कीमतें अन्य लागतों, करों और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर भी निर्भर करती हैं।

फिलहाल निवेशकों की नजर मध्य-पूर्व की बातचीत, संभावित सैन्य कार्रवाई और वैश्विक तेल आपूर्ति से जुड़े फैसलों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यही घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों की अगली दिशा तय कर सकते हैं।

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