फिल्ममेकर संजय गुप्ता के निधन के बाद उनके परिवार से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। मुंबई में अंतिम संस्कार के दौरान सामने आए इस वीडियो में उनकी बेटी दलई कथित तौर पर पैपराजी की ओर आपत्तिजनक इशारा करती नजर आईं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अब उनकी पत्नी अनुराधा लेखी गुप्ता ने इस मामले पर सफाई देते हुए लोगों और मीडिया से संवेदनशीलता बरतने की अपील की है।
बेटी के वायरल वीडियो पर पत्नी ने दी सफाई
संजय गुप्ता का 30 अक्टूबर 2026 को 57 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुंबई स्थित उनके घर पर दुर्घटनावश गिरने से उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी। उनके अचानक चले जाने से परिवार गहरे सदमे में है।
इसी बीच अंतिम संस्कार के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें उनकी बेटी दलई कथित तौर पर कैमरे की तरफ मिडिल फिंगर दिखाती नजर आईं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने उनके व्यवहार पर सवाल उठाए।
मामले पर अनुराधा ने फिल्ममेकर मिलाप जावेरी के माध्यम से बयान जारी किया। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे हमेशा मीडिया की चकाचौंध और पैपराजी संस्कृति से दूर रहे हैं। पिता को खोने के गहरे दुख के बीच अचानक कैमरों और लोगों की मौजूदगी उनके लिए बेहद मुश्किल हो सकती है।
‘बच्चे अपूरणीय नुकसान से जूझ रहे हैं’
अनुराधा ने अपने बयान में बच्चों की स्थिति को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुख और मानसिक पीड़ा के दौरान बच्चों की कुछ प्रतिक्रियाएं मीडिया के सदस्यों के प्रति सामने आ सकती हैं। इस घटना से किसी को ठेस पहुंची हो, तो उन्होंने उसके लिए खेद जताते हुए माफी भी मांगी।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि बच्चों के व्यवहार को केवल वायरल वीडियो के आधार पर न परखें। उनके मुताबिक, बच्चे अपने पिता को खोने के बाद इस अपूरणीय क्षति को स्वीकार करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में उन्हें आलोचना के बजाय सहानुभूति और भावनात्मक सहयोग की जरूरत है।
बच्चों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें हटाने की अपील
अनुराधा ने मीडिया संस्थानों, पैपराजी और सोशल मीडिया यूजर्स से बच्चों से जुड़ी ऐसी तस्वीरें, वीडियो और अन्य सामग्री हटाने की अपील की, जो भविष्य में उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि परिवार इस समय बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है और बच्चों को इस सदमे से उबरने के लिए निजता, संवेदनशीलता और पर्याप्त समय चाहिए। उनका मानना है कि इस मुश्किल घड़ी में बच्चों की भावनाओं और परिस्थितियों का सम्मान किया जाना चाहिए।
तीन दशक से ज्यादा का रहा फिल्मी सफर
संजय गुप्ता हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक और फिल्ममेकर थे। उन्होंने 1994 में फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ से निर्देशन की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने ‘कांटे’, ‘मुसाफिर’, ‘शूटआउट एट वडाला’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई।
तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने कई चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल है। वहीं, परिवार से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि किसी के निजी दुख के समय मीडिया कवरेज और बच्चों की निजता के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।

