सोशल मीडिया पर इन दिनों ट्रेन से जुड़ा एक वीडियो चर्चा में है, जिसमें एक यात्री और ट्रेन के अटेंडेंट के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि अटेंडेंट ने एक यात्री को ट्रेन में उपलब्ध कराए गए तौलिये ले जाते हुए पकड़ लिया था। इसके बाद दोनों के बीच काफी देर तक बहस हुई। वीडियो में अटेंडेंट यात्री से तौलिया वापस करने की मांग करता नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि यह घटना 7 अक्टूबर 2026 की सुबह खजुराहो-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस के 3एसी कोच में हुई। घटना चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन से जुड़ी बताई जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद ट्रेन में मिलने वाली सुविधाओं और यात्रियों की जिम्मेदारी को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई।
कोच से तौलिये गायब होने का दावा
जानकारी के मुताबिक, ट्रेन के अटेंडेंट को ग्वालियर से चित्तौड़गढ़ तक सफर के दौरान कोच में रखे तौलियों के गायब होने का पता चला। दावा है कि चित्तौड़गढ़ पहुंचने तक कोच में एक भी तौलिया उपलब्ध नहीं था। इसके बाद अटेंडेंट को यात्रियों पर संदेह हुआ और उसने कुछ यात्रियों के सामान की जांच करने की बात कही।
इसी दौरान एक यात्री के बैग से कुछ तौलिये मिलने का दावा किया गया। इन पर 49, 50, 51 और 52 नंबर के सेट होने की बात सामने आई। इसके बाद अटेंडेंट ने यात्री को रोक लिया और तौलिये वापस करने के लिए कहा।
यात्री और अटेंडेंट के बीच हुई बहस
वायरल वीडियो में अटेंडेंट यात्री से काफी नाराज नजर आता है। वह कहता है कि ट्रेन में सामान गायब होने पर उसका नुकसान उसकी सैलरी से काटा जाता है। इसी बात को लेकर वह यात्री से तौलिया वापस करने की मांग करता है।
वीडियो में अटेंडेंट की भाषा और उसके व्यवहार को लेकर भी चर्चा हो रही है। वह यात्री के एसी कोच में सफर करने के बावजूद तौलिया ले जाने पर सवाल उठाता है। दूसरी तरफ यात्री उससे शांत होकर बात करने की अपील करता है और माफी मांगता हुआ दिखाई देता है।
यात्री की ओर से एक तौलिया वापस किए जाने की बात भी सामने आई है, जबकि अटेंडेंट का दावा था कि कुल चार तौलिये गायब हैं। इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच बहस बढ़ती दिखाई देती है।
स्टेशन पर भी जारी रही बहस
वीडियो के अनुसार, चित्तौड़गढ़ स्टेशन पर पहुंचने के बाद भी अटेंडेंट और यात्री के बीच विवाद खत्म नहीं हुआ। अटेंडेंट यात्री से जवाब मांगता और तौलिये वापस करने की बात करता दिखाई देता है। यात्री असहज स्थिति में नजर आता है।
बताया जा रहा है कि इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था, जिसके बाद यह तेजी से चर्चा में आ गया। हालांकि बाद में वीडियो को हटा दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
यात्रियों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग दो अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। एक तरफ ट्रेन में उपलब्ध सामान को बिना अनुमति ले जाने को गलत बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अटेंडेंट के कथित व्यवहार और यात्री को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ट्रेन में यात्रियों को दी जाने वाली चादर, कंबल और तौलिये जैसी सुविधाएं निर्धारित उपयोग के लिए होती हैं। ऐसे में उन्हें बिना अनुमति ले जाना रेलवे की संपत्ति के दुरुपयोग के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं किसी भी विवाद को शांतिपूर्ण और निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुलझाना भी जरूरी है। वायरल वीडियो ने इसी पूरे मामले को लेकर यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की जिम्मेदारियों पर बहस छेड़ दी है।

