3 Oct 2026, Sat

”घरों की बिक्री पर सरकारों को जाता है 30-50% तक का टैक्स”, क्रेडाई अध्यक्ष बोले- किफायती घर बनाने में बिल्डर असमर्थ

नई दिल्ली: देश में किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ाने को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर की ओर से सरकार के सामने अहम मांग रखी गई है। रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से प्रति फ्लैट 45 लाख रुपये की अधिकतम कीमत की सीमा को हटाने की मांग की है।

उनका कहना है कि जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी, निर्माण सामग्री और श्रम की लागत बढ़ने के साथ-साथ विभिन्न करों का बोझ भी बढ़ा है। ऐसे में मौजूदा कीमत सीमा के भीतर किफायती मकान उपलब्ध कराना डेवलपर्स के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

45 लाख रुपये की सीमा हटाने की मांग

शेखर पटेल ने कहा कि किफायती आवास की मौजूदा परिभाषा में कीमत की अधिकतम सीमा को हटाकर इसे नए तरीके से निर्धारित किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किफायती मकान की पहचान केवल उसकी कीमत के आधार पर करने के बजाय फ्लैट के क्षेत्रफल को भी प्रमुख आधार बनाया जा सकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि महानगरों में 60 वर्ग मीटर और गैर-महानगरों में 90 वर्ग मीटर तक के घरों को किफायती आवास की श्रेणी में शामिल किया जाए। इससे अलग-अलग शहरों में जमीन और निर्माण लागत के हिसाब से आवास परियोजनाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है।

जमीन और निर्माण लागत बनी बड़ी चुनौती

रियल एस्टेट क्षेत्र के मुताबिक, पिछले कुछ समय में जमीन की कीमतों के साथ निर्माण लागत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। सीमेंट, स्टील और अन्य निर्माण सामग्री की कीमतों के अलावा श्रम लागत बढ़ने से परियोजनाओं की कुल लागत प्रभावित होती है।

ऐसे में 45 लाख रुपये की निर्धारित सीमा के भीतर घर तैयार करना कई बाजारों में चुनौतीपूर्ण हो गया है। खासतौर पर महानगरों और बड़े शहरों में जमीन की ऊंची कीमतों के कारण डेवलपर्स के सामने यह समस्या और बढ़ जाती है।

टैक्स के बोझ का भी उठाया मुद्दा

शेखर पटेल ने घरों की बिक्री से जुड़े करों का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, डेवलपर्स को बिक्री मूल्य का करीब 30 से 50 प्रतिशत तक हिस्सा विभिन्न स्तरों पर कर और शुल्क के रूप में देना पड़ता है। इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और नगर निकायों से जुड़े कर एवं शुल्क शामिल होने की बात कही गई है।

रियल एस्टेट संगठन का कहना है कि लागत और करों का दबाव कम होने से किफायती आवास की परियोजनाओं को बढ़ावा मिल सकता है। इससे बाजार में सस्ते घरों की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अगले छह महीनों में नीतिगत पहल की उम्मीद

शेखर पटेल ने उम्मीद जताई कि किफायती आवास की मांग और आपूर्ति को बढ़ाने के लिए आने वाले छह महीनों में कुछ नीतिगत कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर सरकार के साथ बातचीत जारी है।

रियल एस्टेट क्षेत्र की मांग है कि बदलती लागत और अलग-अलग शहरों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किफायती आवास की परिभाषा को अधिक व्यावहारिक बनाया जाए, ताकि आम लोगों के लिए घरों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

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