घर बनाने या मकान की मरम्मत कराने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अक्टूबर में निर्माण लागत बढ़ सकती है। सितंबर में सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब अक्टूबर में भी कंपनियां दाम बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के ज्यादातर बाजारों में सीमेंट की कीमत प्रति बोरी ₹5 से ₹20 तक बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, कंपनियों की ओर से प्रस्तावित बढ़ोतरी कितनी सफल होगी, यह सीमेंट की मांग और डीलरों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
सितंबर में ₹7 प्रति बोरी बढ़े दाम
सितंबर के दौरान देशभर में सीमेंट की औसत ट्रेड कीमत में महीने-दर-महीने करीब ₹7 प्रति बोरी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बाद औसत कीमत लगभग ₹356 प्रति बोरी तक पहुंच गई। इससे पहले जुलाई और अगस्त के दौरान सीमेंट की कीमतों में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला था।
सितंबर में ट्रेड के साथ-साथ नॉन-ट्रेड सेगमेंट में भी कीमतों में बढ़ोतरी हुई। नॉन-ट्रेड सेगमेंट में दाम अपेक्षाकृत ज्यादा बढ़े। हालांकि, कंपनियों द्वारा बढ़ाई गई बिलिंग कीमत का पूरा असर बाजार में ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाया।
कुछ बाजारों में पुरानी कीमत पर हुई बिक्री
सितंबर के दौरान कुछ बाजारों में डीलरों ने तिमाही के अंत में बिक्री का लक्ष्य पूरा करने के लिए पुरानी कीमतों पर ही सीमेंट की बिक्री की। यही वजह रही कि कंपनियों द्वारा बढ़ाई गई कीमत और वास्तविक बाजार कीमत के बीच कुछ अंतर देखने को मिला।
ऐसे में अक्टूबर में कंपनियों की ओर से दोबारा कीमत बढ़ाने की कोशिश की जाती है तो उसका असर बाजार में किस स्तर तक दिखाई देगा, यह डीलरों की सहमति और निर्माण गतिविधियों पर निर्भर करेगा।
दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
क्षेत्रवार आंकड़ों की बात करें तो सितंबर में दक्षिण भारत में सीमेंट की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी। यहां प्रति बोरी करीब ₹11 की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद पश्चिम भारत में सीमेंट लगभग ₹9 प्रति बोरी महंगा हुआ।
वहीं मध्य भारत, पूर्वी भारत और उत्तर भारत के बाजारों में कीमतों में करीब ₹5 प्रति बोरी की बढ़ोतरी देखने को मिली। इससे साफ है कि अलग-अलग क्षेत्रों में सीमेंट की कीमतों पर मांग और स्थानीय परिस्थितियों का अलग-अलग असर रहा।
अक्टूबर में क्यों बढ़ सकते हैं दाम?
अक्टूबर में कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। निर्माण गतिविधियां और सीमेंट की मांग इनमें प्रमुख हैं। जुलाई और अगस्त में कई बाजारों में मांग सीमित रही थी, लेकिन सितंबर में कुछ क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों में सुधार देखने को मिला।
बारिश का भी सीमेंट की मांग पर क्षेत्रीय असर पड़ा। अधिक बारिश वाले इलाकों में निर्माण कार्य प्रभावित हुआ, जबकि कम बारिश वाले क्षेत्रों में गतिविधियां अपेक्षाकृत बेहतर रहीं।
इसके अलावा हाल के हफ्तों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इससे सीमेंट कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में कंपनियां बढ़ी लागत की भरपाई के लिए कीमतों में वृद्धि करने की कोशिश कर सकती हैं।
मांग और डीलरों की प्रतिक्रिया पर रहेगी नजर
अक्टूबर में सीमेंट की कीमत वास्तव में कितनी बढ़ती है, यह मुख्य रूप से निर्माण क्षेत्र की मांग और डीलरों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। यदि बाजार में मांग मजबूत रहती है और डीलर बढ़ी कीमतों को स्वीकार करते हैं, तो प्रस्तावित बढ़ोतरी का असर ग्राहकों तक पहुंच सकता है। वहीं कमजोर मांग या डीलरों की असहमति की स्थिति में कंपनियों के लिए पूरी बढ़ोतरी लागू करना मुश्किल हो सकता है।
इसका सीधा असर घर बनाने, मकान की मरम्मत और अन्य निर्माण कार्यों के बजट पर पड़ सकता है।

