अंतरिक्ष में मौजूद एक पुराने वैज्ञानिक टेलीस्कोप को बचाने के लिए भेजा गया स्पेसक्राफ्ट अपना मिशन पूरा नहीं कर सका। करीब 3 करोड़ डॉलर यानी लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत वाले इस मिशन का उद्देश्य टेलीस्कोप को ऊंची कक्षा में पहुंचाकर उसकी कार्य अवधि बढ़ाना था। हालांकि, तकनीकी समस्याओं के चलते स्पेसक्राफ्ट टेलीस्कोप को पकड़ने और उसकी कक्षा बदलने में असफल रहा। शुक्रवार को यह स्पेसक्राफ्ट धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते ही नष्ट हो गया।
यह टेलीस्कोप साल 2004 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। इसे ब्रह्मांड में होने वाली बेहद तेज और शक्तिशाली घटनाओं का अध्ययन करने के लिए तैयार किया गया था। यह गामा-रे विस्फोट, तारों के विस्फोट और अंतरिक्ष में होने वाली अचानक घटनाओं का पता लगाने में अहम भूमिका निभाता रहा है। इसकी खासियत यह है कि किसी घटना का पता चलने के बाद यह बहुत तेजी से अपनी दिशा बदल सकता है और उस क्षेत्र का अध्ययन कर सकता है। इसके जरिए दूसरी अंतरिक्ष वेधशालाओं को भी महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी दी जाती रही है।
हाल के समय में टेलीस्कोप की कक्षा तेजी से नीचे आने लगी थी। सूर्य से निकलने वाली शक्तिशाली सौर गतिविधियों के कारण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का घनत्व बढ़ा, जिससे टेलीस्कोप पर वायुमंडलीय खिंचाव ज्यादा असर डालने लगा। इसकी वजह से उसके धरती के वायुमंडल में प्रवेश करने का खतरा बढ़ गया। इसी स्थिति को देखते हुए उसकी वैज्ञानिक गतिविधियों को रोक दिया गया था और उसकी कक्षा को कुछ समय तक स्थिर रखने की कोशिश की गई।
टेलीस्कोप को बचाने के लिए एक विशेष निजी स्पेसक्राफ्ट तैयार किया गया था। इसे 3 जुलाई को अंतरिक्ष में भेजा गया। योजना के मुताबिक स्पेसक्राफ्ट को टेलीस्कोप के बेहद करीब पहुंचकर उसकी तस्वीरें लेनी थीं और फिर रोबोटिक भुजाओं की मदद से उसे पकड़ना था। इसके बाद दोनों को एक ऊंची और अधिक स्थिर कक्षा में ले जाने की योजना थी। ऐसा होने पर टेलीस्कोप को कुछ और वर्षों तक अंतरिक्ष में सक्रिय रखा जा सकता था।
मिशन के दौरान स्पेसक्राफ्ट टेलीस्कोप से करीब 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तक पहुंचने में सफल रहा और उसकी तस्वीरें भी ली गईं। लेकिन इससे आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। लॉन्च के बाद ही स्पेसक्राफ्ट में इलेक्ट्रॉनिक समस्याएं सामने आने लगी थीं। टेलीस्कोप को सही दिशा में घुमाने और उसके पास सुरक्षित तरीके से पहुंचने के लिए इस्तेमाल होने वाले तीन रिएक्शन व्हील में से दो खराब हो गए। इससे स्पेसक्राफ्ट की दिशा और स्थिति को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो गया।
तकनीकी खराबियों के कारण बचाव अभियान को आगे बढ़ाना संभव नहीं रहा और अंततः स्पेसक्राफ्ट ने काम करना बंद कर दिया। अब जिस टेलीस्कोप को बचाने के लिए यह अभियान चलाया गया था, उसकी कक्षा लगातार नीचे जा रही है। मौजूदा अनुमान के मुताबिक वह नवंबर की शुरुआत में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है।
करीब 22 वर्षों तक अंतरिक्ष में काम करने वाला यह टेलीस्कोप वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। इसके संभावित अंत के बाद वैज्ञानिक समुदाय के सामने इसके स्थान पर नई अंतरिक्ष वेधशालाओं के जरिए ऐसी घटनाओं की निगरानी जारी रखने की चुनौती होगी।

