25 Sep 2026, Fri

ममता की TMC के नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, EC से पूछा- कब तक होगा निपटारा?

पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका में चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विवाद का अंतिम निपटारा करने में कितना समय लगेगा।

अदालत ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील को आयोग से निर्देश लेकर अगली सुनवाई में समयसीमा के बारे में जानकारी देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 28 सितंबर को होगी।

क्या है पूरा विवाद?

तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो गुटों के बीच संगठन और पार्टी की पहचान को लेकर विवाद चल रहा है। इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत मूल पार्टी नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया। दोनों गुटों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं।

चुनाव आयोग का यह कदम पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों से पहले आया है। इन सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है।

दोनों गुटों को मिले अलग नाम और निशान

अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था विवाद का अंतिम फैसला होने तक चुनावी प्रक्रिया के लिए लागू है।

इससे पहले चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे थे। आयोग का अंतरिम आदेश मूल पार्टी पहचान को लेकर चल रहे विवाद के अंतिम निपटारे तक की व्यवस्था से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान अदालत का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि चुनाव आयोग आखिर इस विवाद पर अंतिम निर्णय कब तक ले सकता है। ममता बनर्जी की ओर से दलील दी गई कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के दौरान लिया गया फैसला उनके गुट के लिए प्रभावी कानूनी उपाय की स्थिति को प्रभावित करता है।

अदालत ने फिलहाल उपचुनाव पर रोक लगाने के बजाय चुनाव आयोग से विवाद के अंतिम निपटारे की समयसीमा बताने को कहा है। अब अगली सुनवाई में आयोग की ओर से इस संबंध में जानकारी दी जाएगी।

नंदीग्राम उपचुनाव भी चर्चा में

नाम और चुनाव चिह्न का विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। नंदीग्राम को लेकर ममता बनर्जी के गुट ने बाद में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम के बाद उपचुनाव की राजनीतिक तस्वीर में भी बदलाव देखने को मिला है।

अब सबकी नजर 28 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। उस दिन चुनाव आयोग विवाद के अंतिम निपटारे में लगने वाले समय को लेकर अपना पक्ष अदालत के सामने रख सकता है।

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