दुनिया में रेलवे से जुड़ी कई ऐसी तकनीकें मौजूद हैं, जिन्हें पहली नजर में देखकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। आमतौर पर ट्रेन पटरियों के ऊपर दौड़ती हुई दिखाई देती है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी ट्रेन देखी है जो पटरी के नीचे लटककर चलती हो? दुनिया के कुछ देशों में ऐसी अनोखी रेल व्यवस्था मौजूद है, जहां ट्रेन जमीन पर बिछी पटरियों पर चलने के बजाय ऊपर बने ट्रैक से लटककर सफर करती है। सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो और तस्वीरें अक्सर लोगों का ध्यान खींचते हैं।
क्या होती है हैंगिंग ट्रेन?
इस तरह की रेल व्यवस्था को आमतौर पर सस्पेंशन रेलवे सिस्टम, हैंगिंग रेलवे या सस्पेंडेड मोनोरेल कहा जाता है। इसमें ट्रेन जमीन पर मौजूद सामान्य रेलवे ट्रैक पर नहीं चलती। इसके बजाय एक ऊंचे स्ट्रक्चर या बीम के नीचे ट्रेन का सिस्टम जुड़ा होता है और कोच उसी ट्रैक से लटकते हुए आगे बढ़ते हैं।
इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि ट्रेन का बड़ा हिस्सा ट्रैक के नीचे रहता है, जबकि उसका सपोर्टिंग स्ट्रक्चर ऊपर बना होता है। इस वजह से यात्रियों को सफर के दौरान जमीन और आसपास का अलग तरह का दृश्य दिखाई देता है। देखने में यह व्यवस्था काफी असामान्य लगती है, लेकिन इसके पीछे विशेष इंजीनियरिंग और सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
किन देशों में देखने को मिलती है ऐसी ट्रेन?
हैंगिंग या सस्पेंडेड मोनोरेल तकनीक सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है। जापान के अलावा दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में भी इस तरह की प्रणालियां विकसित की गई हैं। हालांकि जापान की सस्पेंडेड मोनोरेल व्यवस्था अपने आधुनिक डिजाइन और लंबाई के कारण खास पहचान रखती है।
जापान में चिबा अर्बन मोनोरेल इसका प्रमुख उदाहरण है। यह शहर के परिवहन नेटवर्क का हिस्सा है और सस्पेंडेड मोनोरेल तकनीक पर आधारित है। ट्रेन ऊपर बने ट्रैक के नीचे लटकी हुई आगे बढ़ती है। इसका डिजाइन सामान्य मेट्रो या रेलवे सिस्टम से बिल्कुल अलग दिखाई देता है।
इसके अलावा जापान में शोनान मोनोरेल भी इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल करती है। इस तरह की ट्रेनें शहरी इलाकों में परिवहन का एक अलग विकल्प उपलब्ध कराती हैं।
देखकर हैरान रह जाते हैं लोग
सस्पेंडेड मोनोरेल का वीडियो जब सोशल मीडिया पर सामने आता है तो कई लोग पहली नजर में इसे समझ नहीं पाते। ट्रेन को हवा में लटका हुआ देखकर ऐसा लगता है जैसे वह बिना किसी सामान्य पटरी के चल रही हो। हालांकि वास्तव में ट्रेन एक मजबूत ऊंचे ट्रैक और सपोर्टिंग सिस्टम से जुड़ी होती है।
इस तकनीक में ट्रेन को स्थिर रखने, मोड़ पर सुरक्षित तरीके से चलाने और यात्रियों को आरामदायक सफर देने के लिए विशेष इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि यह सिस्टम देखने में जितना अनोखा लगता है, उसके पीछे की तकनीक उतनी ही दिलचस्प है।
भविष्य की शहरी परिवहन तकनीक की झलक
बढ़ते शहरीकरण के बीच परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में नई तकनीकों पर काम किया जाता रहा है। सस्पेंडेड मोनोरेल भी इसी तरह की इंजीनियरिंग का उदाहरण है। जमीन के स्तर से ऊपर बने ट्रैक पर चलने के कारण इसका डिजाइन पारंपरिक रेल व्यवस्था से काफी अलग नजर आता है।
यही अनोखी तकनीक अब सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। ट्रेन को पटरी के ऊपर दौड़ते देखने के आदी लोगों के लिए नीचे लटककर चलती यह ट्रेन वाकई किसी अजूबे से कम नहीं लगती।

