चावल को आमतौर पर रोजमर्रा के भोजन और एक प्रमुख कृषि उत्पाद के तौर पर देखा जाता है, लेकिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसकी कई ऐसी किस्में मौजूद हैं, जो अपने स्वाद, रंग, खुशबू, खेती के तरीके और स्थानीय परंपराओं के लिए खास पहचान रखती हैं। अब इन अलग-अलग किस्मों को एक ही जगह पर देखने का मौका मिलेगा। भारत इंटरनेशनल राइस कॉनफ्रेंस (BIRC) में दुनिया भर की कमर्शियल महत्व वाली चावल की करीब 200 किस्मों को प्रदर्शित किया जाएगा। यह ग्लोबल राइस कलेक्शन अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले कार्यक्रम का खास आकर्षण होगा।
23 से 25 अक्टूबर तक होगा आयोजन
यह प्रदर्शनी 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित की जाएगी। इसमें भारत के साथ-साथ दुनिया के अलग-अलग देशों में उगाई जाने वाली चावल की प्रमुख किस्मों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इस ग्लोबल कलेक्शन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को एक ही स्थान पर अलग-अलग किस्मों को देखने और उनकी तुलना करने का अवसर देना है। इससे संभावित खरीदारों को अपनी जरूरत के अनुसार चावल की किस्मों और संभावित सप्लायरों की पहचान करने में भी मदद मिल सकेगी।
इटली से जापान तक के चावल होंगे शामिल
प्रदर्शनी में कई देशों की चर्चित चावल की किस्मों को जगह दी जाएगी। इटली का आर्बोरियो, थाईलैंड का जैस्मीन और ग्लूटीनस आरडी6 तथा जापान का सुशी चावल इस कलेक्शन का हिस्सा होंगे। इसके साथ भारत की अलग-अलग पारंपरिक और व्यावसायिक किस्मों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
इस आयोजन का मकसद चावल को केवल एक कमर्शियल कमोडिटी के तौर पर पेश करना नहीं है। इसके जरिए चावल को अलग-अलग क्षेत्रों के भूगोल, जैव विविधता, खान-पान की परंपराओं और खेती के तरीकों से जोड़कर दिखाने की कोशिश की जाएगी।
भारत की बासमती और गैर-बासमती किस्में
भारतीय चावल की व्यावसायिक किस्मों में पूसा बासमती, सुगंधा और शरबती सहित बासमती की कई किस्मों को प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं, गैर-बासमती चावल की प्रमुख किस्मों में पीआर-11, पीआर-14, परमल और सोना मसूरी शामिल होंगी।
इस कलेक्शन में भारत के अलग-अलग हिस्सों में उगाई जाने वाली क्षेत्रीय और पारंपरिक किस्मों को भी खास जगह दी जाएगी। इससे देश की चावल विविधता को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलेगा।
अलग-अलग राज्यों की खास किस्में भी होंगी शामिल
प्रदर्शनी में केरल की नवारा और रक्तशाली जैसी किस्में दिखाई जाएंगी। तमिलनाडु से सीरागा सांबा, मपिल्लई सांबा और करुप्पु कावुनी को शामिल किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की दुबराज और पश्चिम बंगाल की तुलाईपंजी भी इस संग्रह का हिस्सा होंगी।
इसके अलावा मणिपुर का चाक-हाओ काला चावल, असम का जोहा चावल और उत्तर प्रदेश का काला नमक भी प्रदर्शित किया जाएगा। मध्य प्रदेश की चिन्नौर, महाराष्ट्र की आंबेमोहर और कश्मीर की मुश्कबुदजी जैसी क्षेत्रीय किस्में भी इस ग्लोबल कलेक्शन में देखने को मिलेंगी।
इस तरह यह प्रदर्शनी चावल की दुनिया में मौजूद विविधता को एक ही मंच पर सामने लाएगी। करीब 200 किस्मों के इस संग्रह के जरिए चावल के व्यावसायिक महत्व के साथ-साथ उससे जुड़ी क्षेत्रीय पहचान, परंपराओं और खेती की विविधता को भी समझने का अवसर मिलेगा।

