16 Sep 2026, Wed

साइलेंट किलर हो सकते हैं ब्लड प्रेशर और आर्टरीज से जुड़े ये बदलाव, महिलाएं भूलकर भी न करें इग्नोर

हार्ट से जुड़ी समस्याओं को लेकर अक्सर माना जाता है कि इनका खतरा उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा होता है। लेकिन शरीर में होने वाले कुछ बदलाव इससे काफी पहले ही शुरू हो सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर और धमनियों का सख्त होना यानी आर्टरी स्टिफनेस भी ऐसे बदलाव हैं, जो लंबे समय तक बिना किसी बड़े लक्षण के रह सकते हैं। खासतौर पर महिलाओं के लिए 30 से 40 साल की उम्र के बीच का समय हार्ट हेल्थ पर ध्यान देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस उम्र के आसपास महिलाओं में ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। वहीं, शरीर के अंदर हार्ट और ब्लड वेसल्स में होने वाले बदलाव कई बार इससे पहले ही शुरू हो जाते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर हार्ट हेल्थ का आकलन करना पर्याप्त नहीं माना जाता।

क्या है आर्टरी स्टिफनेस?

उम्र बढ़ने के साथ धमनियां धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक लचक खो सकती हैं। धमनियों के कम लचीले होने की इस स्थिति को आर्टरी स्टिफनेस या धमनियों का कठोर होना कहा जाता है। जब धमनियां कम लचीली होती हैं, तो हार्ट से पंप होने वाले ब्लड के दबाव को संभालना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।

इसका असर पल्स प्रेशर पर भी पड़ सकता है। पल्स प्रेशर सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बीच का अंतर होता है। ऐसे में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किसी समय ब्लड प्रेशर सामान्य है या नहीं। समय के साथ ब्लड प्रेशर में होने वाले बदलाव और उसके पैटर्न पर भी ध्यान देना जरूरी है।

हार्मोनल बदलाव भी डाल सकते हैं असर

महिलाओं में मिडलाइफ के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव हार्ट और ब्लड वेसल्स की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के आसपास शरीर में कई बदलाव एक साथ दिखाई दे सकते हैं।

इस दौरान वजन बढ़ना, नींद में बदलाव, तनाव, शारीरिक गतिविधि कम होना और मेटाबॉलिक बदलाव जैसे कारक सामने आ सकते हैं। हालांकि, हर महिला में हार्ट से जुड़ा जोखिम एक जैसी उम्र में या एक ही तरीके से बढ़े, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार नियमित जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

30 और 40 की उम्र में इन जांचों पर दें ध्यान

विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को 30 और 40 की उम्र में ही नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता देनी चाहिए। ब्लड प्रेशर के साथ कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और वजन पर नजर रखना जरूरी है। कमर का माप और रोजाना की शारीरिक गतिविधि पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

अगर परिवार में किसी सदस्य को हार्ट से जुड़ी बीमारी रही है, तो इस जानकारी को डॉक्टर के साथ साझा करना और उचित जांच करवाना महत्वपूर्ण हो सकता है।

बढ़ता ब्लड प्रेशर समझकर न करें नजरअंदाज

अगर ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ रहा है या उसके पैटर्न में बदलाव दिखाई दे रहा है, तो इसे केवल उम्र या तनाव का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हार्ट हेल्थ की देखभाल केवल लक्षण दिखाई देने के बाद शुरू करने के बजाय पहले से ही की जानी चाहिए।

संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करने जैसी आदतों के साथ समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना हार्ट हेल्थ की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। खासकर 30 से 40 की उम्र में महिलाएं अपने ब्लड प्रेशर और अन्य स्वास्थ्य संकेतकों पर नियमित नजर रखकर समय रहते जरूरी कदम उठा सकती हैं।

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