BRICS शिखर सम्मेलन के बाद भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दोनों देशों की सेनाएं 15 सितंबर से 28 सितंबर तक संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही हैं। इस अभ्यास में करीब 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार सैन्य अभ्यास को दो अलग-अलग भौगोलिक और ऑपरेशनल परिस्थितियों में आयोजित किया जा रहा है।
रेगिस्तान और पहाड़ों में एक साथ अभ्यास
संयुक्त सैन्य अभ्यास का एक चरण राजस्थान के बीकानेर के पास महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया जा रहा है। यहां दोनों देशों के सैनिक रेगिस्तानी इलाके में युद्ध संचालन से जुड़ी विभिन्न क्षमताओं का अभ्यास करेंगे। इसमें लंबी दूरी तक फायरिंग, सटीक हमले, सैनिकों की तेज आवाजाही और संयुक्त अभियानों पर विशेष ध्यान रहेगा।
वहीं, दूसरा चरण उत्तराखंड के औली में हो रहा है। यहां सैनिकों को ऊंचाई वाले और कठिन पहाड़ी इलाकों में सैन्य अभियान चलाने की तकनीक का अभ्यास कराया जा रहा है। इसके साथ एयर मोबिलिटी और मुश्किल परिस्थितियों में सैन्य लॉजिस्टिक्स को प्रभावी बनाए रखने पर भी जोर दिया जाएगा। औली वास्तविक नियंत्रण रेखा से करीब 95 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
करीब 700 सैनिक ले रहे हैं हिस्सा
इस बार अभ्यास में भारत और अमेरिका के लगभग 350-350 सैनिक शामिल हैं। दोनों देशों के जवान एक-दूसरे के साथ मिलकर अलग-अलग परिस्थितियों में अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल युद्ध कौशल का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय विकसित करना भी है।
अभ्यास के दौरान कमांड, संचार, फायर सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं से जुड़े कई पहलुओं पर संयुक्त प्रशिक्षण किया जा रहा है। इससे भविष्य में किसी संयुक्त अभियान के दौरान दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है।
पहली बार काउंटर-ड्रोन तकनीक पर खास फोकस
इस अभ्यास की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक काउंटर-ड्रोन वॉरफेयर है। पहली बार अमेरिकी Mobile Low, Slow, Small Unmanned Aircraft Integrated Defeat System यानी MLIDS को भारत में इस अभ्यास के दौरान शामिल किया जा रहा है।
इसके जरिए ड्रोन से पैदा होने वाले संभावित खतरों की पहचान, उनकी निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमताओं का अभ्यास किया जाएगा। आधुनिक युद्ध में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह प्रशिक्षण काफी अहम माना जा रहा है।
बदलती युद्ध तकनीक पर दोनों देशों का जोर
अभ्यास में Command Post Exercise, Field Training Exercise और Combined Live-Fire Demonstration जैसे अलग-अलग चरण शामिल हैं। दोनों देशों के सैनिक आधुनिक हथियार प्रणालियों, नई तकनीकों और युद्ध के दौरान हासिल अनुभवों को साझा कर रहे हैं।
हाल के संघर्षों में ड्रोन, सटीक हमले, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और कई स्तरों पर एक साथ चलने वाले सैन्य अभियानों की भूमिका बढ़ी है। ऐसे में इस संयुक्त अभ्यास का फोकस भी आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप दिखाई दे रहा है।
अभ्यास से भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच आपसी समझ, तकनीकी तालमेल और संयुक्त अभियान क्षमता को और मजबूत करने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

