BRICS के मंच पर शामिल हर बड़ी अर्थव्यवस्था अपनी अलग ताकत के साथ मौजूद है। चीन की पहचान मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से है, रूस ऊर्जा संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि खाड़ी देशों के पास बड़ी मात्रा में पूंजी और निवेश की ताकत है। ऐसे में भारत की भूमिका भी सिर्फ एक बड़ी अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। भारत ने BRICS के सामने अपनी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, UPI, फार्मास्यूटिकल्स और तकनीकी रूप से कुशल मानव संसाधन को पेश किया है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना भारत की बड़ी पहचान
भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में जिस तरह का मॉडल तैयार किया है, उसकी चर्चा दुनियाभर में होती है। UPI ने करोड़ों लोगों को तेज और आसान डिजिटल भुगतान की सुविधा दी है। भारत अब इसी अनुभव को दूसरे विकासशील देशों के साथ साझा करना चाहता है।
BRICS के मंच पर भारत ने साझा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों में मौजूद डिजिटल प्रणालियों को बेहतर तरीके से जोड़ना है। इससे सीमा पार भुगतान को आसान बनाने और स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
सस्ती दवाओं से स्वास्थ्य सुरक्षा में योगदान
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी भारत की स्थिति काफी मजबूत है। जेनेरिक दवाओं के बड़े उत्पादक के रूप में भारत कई देशों की दवा जरूरतों को पूरा करता है। महामारी के दौरान भी भारतीय दवा उद्योग की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी।
किफायती दवाओं और टीकों की उपलब्धता ने भारत को विकासशील देशों के लिए एक अहम स्वास्थ्य साझेदार बनाया है। BRICS के विस्तार के बीच स्वास्थ्य सुरक्षा और दवाओं की आपूर्ति को लेकर भारत की यह क्षमता संगठन के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
AI और तकनीकी कौशल पर जोर
भारत की एक और बड़ी ताकत उसका विशाल स्किल्ड वर्कफोर्स है। आईटी सेवाओं से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक भारत ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
भारत BRICS देशों के बीच क्षमता निर्माण और तकनीकी प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में भी जोर दे रहा है। इसका मकसद युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए कुशल मानव संसाधन विकसित करना है।
ग्लोबल साउथ के लिए भारत का डिजिटल मॉडल
भारत की कोशिश सिर्फ अपनी तकनीक और सेवाओं को बढ़ावा देने की नहीं है, बल्कि इन्हें विकासशील देशों के लिए उपयोगी मॉडल के तौर पर पेश करने की भी है। डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सेवाएं और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में भारत का अनुभव दूसरे देशों के लिए उपयोगी हो सकता है।
यही वजह है कि BRICS में भारत की खासियत केवल बाजार या आर्थिक आकार नहीं, बल्कि कम लागत वाली तकनीक, डिजिटल व्यवस्था, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और कुशल मानव संसाधन का संयोजन है। आने वाले समय में इन क्षेत्रों के जरिए भारत BRICS के भीतर सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर सकता है।

