नई दिल्ली, 7 सितंबर: दिल्ली में अपना घर बनवाने का सपना देखने वाले लोगों के लिए निर्माण से जुड़े नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। राजधानी में मकान बनाने के लिए प्लॉट के आकार, मंजिलों की संख्या और इमारत की ऊंचाई को लेकर निर्धारित नियम हैं। इनका पालन किए बिना निर्माण कराने पर मकान को अवैध माना जा सकता है और संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई भी की जा सकती है।
हाल ही में सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला हॉस्टल की इमारत गिरने की घटना के बाद अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऐसे में घर बनाने से पहले नक्शा पास कराने और निर्माण नियमों को समझना जरूरी है।
50 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर कितनी मंजिल?
दिल्ली में 50 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर अधिकतम पांच मंजिल तक मकान बनाए जाने का प्रावधान है। हालांकि, पांच मंजिला मकान के मामले में ग्राउंड फ्लोर पर स्टिल्ट पार्किंग का प्रावधान जरूरी होता है।
अगर भवन में स्टिल्ट पार्किंग नहीं बनाई जाती है, तो अधिकतम चार मंजिल तक निर्माण किया जा सकता है। इसके अलावा मकान की कुल ऊंचाई भी निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए। नियमों के मुताबिक भवन की ऊंचाई 17.5 मीटर यानी करीब 57.4 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए।
इसलिए केवल मंजिलों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। निर्माण के दौरान भवन की कुल ऊंचाई और अन्य तकनीकी मानकों का भी ध्यान रखना पड़ता है।
छोटे प्लॉट के लिए अलग नियम
अगर प्लॉट का आकार 50 वर्ग मीटर से कम है, तो निर्माण को लेकर नियम अलग हैं। ऐसे प्लॉट पर अधिकतम ग्राउंड प्लस दो मंजिल, यानी कुल तीन स्तर तक मकान बनाया जा सकता है।
छोटे प्लॉट पर निर्माण कराने वालों को भी निर्धारित भवन नियमों, सुरक्षा मानकों और स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही काम करना होता है। नियमों की अनदेखी करके अतिरिक्त मंजिल बनाने पर परेशानी खड़ी हो सकती है।
नक्शा पास कराना जरूरी
दिल्ली में मकान बनाने से पहले संबंधित नगर निकाय से भवन का नक्शा स्वीकृत कराना जरूरी होता है। बिना मंजूरी के निर्माण कराने पर उसे अनधिकृत या अवैध निर्माण माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन की ओर से नोटिस, जुर्माना या जरूरत पड़ने पर निर्माण हटाने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
कुछ मामलों में विकास प्राधिकरण से अनुमति और अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र की जरूरत भी पड़ सकती है। निर्माण के दौरान धूल और प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना भी आवश्यक है।
नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी
मकान बनाने से पहले प्लॉट के आकार, निर्धारित मंजिलों, भवन की ऊंचाई, पार्किंग और जरूरी अनुमतियों की जानकारी हासिल करना जरूरी है। स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्माण कराने से भविष्य में कानूनी विवाद और कार्रवाई से बचा जा सकता है।
सत्य निकेतन जैसी घटनाएं यह भी बताती हैं कि भवन निर्माण में केवल मंजिलों की संख्या ही नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुरक्षा और नियमों का पालन भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए निर्माण शुरू करने से पहले सभी जरूरी मंजूरियां लेना और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार काम करना सुरक्षित विकल्प है।

