हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस ने अब इस मामले को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से मंगलवार को प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया है।
दरअसल, हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद मंच के कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किए जाने का मामला सामने आया था। इसको लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि राजनीतिक विरोध के नाम पर इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं, बीजेपी की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया जा रहा है।
मामला अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस ने इसे लेकर प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार की है। पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से मंगलवार को प्रदर्शन किया जाएगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है और इसे जनता के बीच भी उठाया जाएगा।
राहुल गांधी के खिलाफ FIR को लेकर भी विरोध
इस पूरे विवाद में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कांग्रेस का विरोध भी जारी है। पार्टी का कहना है कि कथित ‘शुद्धिकरण’ के मामले को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए विरोध जताया है।
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर आगे बड़े आंदोलन की भी घोषणा की है। पार्टी के अनुसार, सितंबर के पहले सप्ताह में देहरादून में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता सचिवालय का घेराव करेंगे। पार्टी का उद्देश्य सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के साथ-साथ इस पूरे मामले को राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दा बनाना है।
बीजेपी-कांग्रेस के बीच बढ़ी बयानबाजी
मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ के बाद से ही उत्तराखंड की राजनीति में दोनों प्रमुख दलों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। कांग्रेस जहां इसे अपमानजनक और आपत्तिजनक घटना बता रही है, वहीं बीजेपी की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर जवाब दिया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है। कांग्रेस के प्रदर्शन और सचिवालय घेराव के ऐलान के बाद बीजेपी भी इस मामले पर अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी में है। ऐसे में सितंबर के पहले सप्ताह में होने वाला विरोध प्रदर्शन उत्तराखंड की राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है।
फिलहाल, हल्द्वानी से शुरू हुआ यह विवाद अब देहरादून तक पहुंचने की तैयारी में है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह एफआईआर और मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ के मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी रखेगी। वहीं, बीजेपी और कांग्रेस के बीच बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी के चलते प्रदेश का सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।

