वॉशिंगटन। अमेरिका में नौकरी और करियर बनाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा आवेदन को लेकर 1 लाख डॉलर से ज्यादा की नई फीस का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित फीस 103,265 डॉलर बताई गई है। यदि इसे अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे विदेशी प्रोफेशनल्स और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों पर इसका बड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है।
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करते हैं और H-1B वीजा के जरिए अपने करियर को आगे बढ़ाते हैं। ऐसे में प्रस्तावित भारी फीस ने भारतीय समुदाय के बीच चिंता बढ़ा दी है।
अंतिम मंजूरी की तैयारी में प्रशासन
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने इस प्रस्ताव को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया है। प्रशासन की योजना इसे साल के अंत तक अंतिम रूप देने की बताई जा रही है। मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित फीस स्थायी तौर पर लागू हो सकती है।
यह प्रस्ताव उस 1 लाख डॉलर की H-1B फीस से जुड़े घटनाक्रम के बाद आया है, जिसका ऐलान डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में किया था। बाद में इस मामले में अमेरिकी अदालत से भी ट्रंप प्रशासन को झटका लगा था। अब प्रशासन ने नई फीस के प्रस्ताव के जरिए H-1B कार्यक्रम से जुड़े खर्चों की भरपाई को इसका आधार बताया है।
DHS के मुताबिक, प्रस्तावित फीस का उद्देश्य अमेरिका की कानूनी इमिग्रेशन व्यवस्था के प्रशासनिक खर्चों की भरपाई के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना है।
किन H-1B आवेदनों पर पड़ेगा असर?
प्रस्तावित नई फीस सभी H-1B आवेदनों पर लागू नहीं होगी। DHS के मुताबिक यह कैप-सब्जेक्ट H-1B पिटीशन पर लागू होगी। वर्तमान व्यवस्था के तहत अमेरिका हर वित्तीय वर्ष में 65,000 नियमित H-1B वीजा उपलब्ध कराता है। इसके अलावा अमेरिकी संस्थानों से एडवांस्ड डिग्री हासिल करने वाले उम्मीदवारों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा का प्रावधान है।
वहीं, कैप-एग्जेम्प्ट H-1B आवेदनों पर यह अतिरिक्त फीस लागू नहीं होगी। इनमें आमतौर पर विश्वविद्यालयों और कुछ गैर-लाभकारी संस्थानों से जुड़े आवेदन शामिल होते हैं।
DHS का तर्क है कि कैप-सब्जेक्ट H-1B पिटीशन दाखिल करने वाले नियोक्ता प्रस्तावित फीस को वहन करने की क्षमता रखते हैं। विभाग के अनुसार इससे संघीय सरकार को कानूनी इमिग्रेशन सिस्टम को संचालित करने से जुड़े खर्चों की भरपाई में मदद मिलेगी।
सरकार को मिल सकता है अरबों डॉलर का राजस्व
प्रस्तावित फीस से अमेरिकी सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व मिलने का अनुमान लगाया गया है। DHS के आकलन के अनुसार करीब 85,000 H-1B याचिकाओं पर यह फीस लागू हो सकती है। इससे सरकार को लगभग 8.8 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।
हालांकि, इतनी बड़ी फीस का प्रस्ताव विदेशी प्रोफेशनल्स और अमेरिकी कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है। खासतौर पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स लंबे समय से H-1B कार्यक्रम के प्रमुख लाभार्थियों में रहे हैं। इसलिए नई फीस को लेकर भारत समेत दूसरे देशों के छात्रों, कर्मचारियों और नियोक्ताओं की नजर अब इस प्रस्ताव की अंतिम मंजूरी पर टिकी हुई है।

