नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय टेक प्रोफेशनल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने ब्रिटेन और भारत की कंपनियों के वर्क कल्चर के बीच अंतर को लेकर अपना अनुभव साझा किया है। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि यूके की एक कंपनी में काम करने के दौरान कई बार ऐसा होता है कि प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद नए टास्क मिलने में समय लग जाता है, जबकि भारतीय कंपनियों में एक काम खत्म होने से पहले ही कई नए काम सौंप दिए जाते थे।
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर @diwakargkp नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। वीडियो में दिवाकर सिंह नाम के टेक्नीशियन ने बताया कि वह ब्रिटेन की एक कंपनी के लिए रिमोटली काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले शुक्रवार उन्होंने एक सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट पूरा करके रिलीज कर दिया था। सोमवार को जब उन्होंने अपना लैपटॉप खोला और ईमेल तथा सेल्सफोर्स चेक किया, तो उन्हें कोई नया टास्क असाइन नहीं किया गया था।
वीडियो में उन्होंने कहा कि कई बार उनके मैनेजर को यह याद नहीं रहता कि उनके पास कोई लंबित काम है या नहीं। उनके अनुसार, यदि वह खुद मैनेजर को संदेश भेजकर अपनी उपलब्धता नहीं बताते, तो संभव है कि उन्हें कुछ दिनों तक कोई नया काम न मिले।
दिवाकर ने इस अनुभव की तुलना भारत में अपनी पिछली नौकरियों से की। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों में स्थिति बिल्कुल अलग थी, जहां एक प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही कई अन्य टास्क लाइन में लग जाते थे। उनके अनुसार, वहां लगातार काम का दबाव रहता था और मैनेजर नियमित रूप से प्रगति की जानकारी लेते रहते थे।
वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा कि शुक्रवार को काम पूरा करने के बाद सोमवार तक उनके पास कोई नया काम नहीं था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्होंने ईमेल और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम कई बार चेक किया, लेकिन कोई नया टास्क दिखाई नहीं दिया।
इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर वर्क-लाइफ बैलेंस, प्रबंधन शैली और कार्य संस्कृति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। कई यूजर्स ने कहा कि विभिन्न देशों की कंपनियों में कार्य संस्कृति का अंतर वास्तविक है और यह कर्मचारियों के अनुभव को प्रभावित करता है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि किसी एक कंपनी के अनुभव के आधार पर पूरे देश की कार्य संस्कृति का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
मानव संसाधन (HR) विशेषज्ञों का मानना है कि वर्क कल्चर कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें कंपनी का आकार, उद्योग, टीम संरचना, प्रबंधन शैली और कार्य की प्रकृति शामिल हैं। कुछ कंपनियां कर्मचारियों को अधिक स्वायत्तता देती हैं, जबकि कुछ संस्थानों में नियमित निगरानी और लगातार टास्क असाइनमेंट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और भारतीय तथा विदेशी कंपनियों में काम कर चुके पेशेवर अपने-अपने अनुभव कमेंट सेक्शन में साझा कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे वर्क-लाइफ बैलेंस पर विचार करने का अवसर बताया, जबकि कुछ ने कहा कि काम की मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण स्पष्ट जिम्मेदारियां, समय पर संवाद और स्वस्थ कार्य वातावरण होता है।

