नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में लगातार हो रही बारिश के बीच शनिवार को दक्षिण दिल्ली के देवली इलाके में बड़ा हादसा हो गया। भारी जलभराव के कारण एक प्राइवेट पार्किंग की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे पार्किंग में खड़ी 10 से ज्यादा गाड़ियां मलबे में दबकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय कोई व्यक्ति वहां मौजूद नहीं था, इसलिए किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। क्षतिग्रस्त वाहनों को देखकर वाहन मालिकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों ने इस हादसे के लिए जलभराव और खराब ड्रेनेज व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से इलाके में भारी बारिश के कारण पानी जमा हो रहा था। पार्किंग के पीछे सड़क और सीवर लाइन से संबंधित निर्माण कार्य चल रहा था, जिसके चलते कई गलियां खोदी गई थीं। पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से दीवार के आसपास लगातार जलभराव बना रहा, जिससे उसकी नींव कमजोर हो गई और आखिरकार दीवार ढह गई।
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि लगभग 8 से 10 गाड़ियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि वे पिछले करीब आठ वर्षों से इसी पार्किंग में वाहन खड़ा कर रहे हैं, लेकिन इससे पहले कभी ऐसी घटना नहीं हुई। उनके अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान ड्रेनेज व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण बारिश का पानी दीवार के पास जमा होता रहा।
इलाके के निवासी प्रवीण कुमार और प्रशांत ने बताया कि वे अपनी कारें इस प्राइवेट पार्किंग में मासिक शुल्क देकर पार्क करते थे। उनके मुताबिक पार्किंग के लिए 1,500 से 1,800 रुपये प्रति माह का शुल्क लिया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा सीवर और सड़क निर्माण कार्य के कारण इलाके की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पानी की निकासी की व्यवस्था की गई होती, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि मॉनसून के दौरान देवली इलाके में जलभराव की समस्या लगातार बनी रहती है। उनका आरोप है कि सीवर की सफाई समय पर नहीं होती और निर्माण कार्य के बाद सड़कों और नालियों को व्यवस्थित तरीके से बहाल नहीं किया जाता। इससे बारिश के दौरान पानी लंबे समय तक जमा रहता है, जिससे आसपास की इमारतों और दीवारों की संरचना पर भी असर पड़ता है।
हादसे के बाद मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। क्षतिग्रस्त वाहनों को बाहर निकालने के लिए जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद ली जा रही है। वाहन मालिक नुकसान के आकलन और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव, कमजोर ड्रेनेज सिस्टम और निर्माण कार्यों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे इलाके की जल निकासी व्यवस्था की तत्काल समीक्षा की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

