महाराष्ट्र में डॉक्टरों की हड़ताल अब अनिश्चितकालीन हो गई है। रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने सरकार और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा CCMP (Certificate Course in Modern Pharmacology) के तहत होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथी दवाइयां लिखने की अनुमति दिए जाने के फैसले का विरोध तेज कर दिया है। पहले यह हड़ताल 24 घंटे के लिए घोषित की गई थी, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस पहल न होने के बाद इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया है।
इस आंदोलन को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) का भी समर्थन मिला है, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन और तेज हो गया है।
आजाद मैदान में डॉक्टरों का प्रदर्शन
गुरुवार को मुंबई के आजाद मैदान में बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टरों और IMA के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने हाथों में तख्तियां लेकर “No CCMP” के नारे लगाए और सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल डॉक्टरों का कहना था कि यह निर्णय चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उनका आरोप है कि सरकार ने बिना पर्याप्त विशेषज्ञ सलाह और व्यापक चर्चा के यह फैसला लिया है।
90 दिन का कोर्स पर्याप्त नहीं: डॉक्टर
हड़ताल कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि केवल 90 दिन का CCMP कोर्स कराकर किसी होम्योपैथी डॉक्टर को आधुनिक एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति देना उचित नहीं है। उनका कहना है कि एमबीबीएस और एमडी डॉक्टरों की वर्षों की मेडिकल शिक्षा, क्लीनिकल ट्रेनिंग और विशेषज्ञता की तुलना इतने छोटे कोर्स से नहीं की जा सकती।
डॉक्टरों के अनुसार, इस फैसले से मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में दवाओं का उपयोग, उनके दुष्प्रभाव और जटिल बीमारियों का उपचार गहन प्रशिक्षण की मांग करता है।
इमरजेंसी सेवाएं फिलहाल जारी
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है। इसलिए इमरजेंसी सेवाएं और पहले से भर्ती मरीजों का इलाज फिलहाल जारी रहेगा। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो भविष्य में इमरजेंसी सेवाओं को भी आंदोलन के दायरे में लाया जा सकता है।
इस बीच राज्य के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
हाईकोर्ट में लंबित मामले का हवाला
डॉक्टरों ने सरकार से यह भी सवाल पूछा है कि जब CCMP से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में लंबित है, तो इतनी जल्दबाजी में यह फैसला क्यों लिया गया। उनका कहना है कि सरकार को अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार करना चाहिए था।
MARD और IMA का आरोप है कि अब तक सरकार की ओर से औपचारिक बातचीत शुरू करने की कोई गंभीर पहल नहीं की गई है, जिससे डॉक्टरों में असंतोष बढ़ा है।
फिलहाल महाराष्ट्र में डॉक्टरों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

