4 Aug 2026, Tue

डिजिटल अरेस्ट के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, RBI को 4 हफ्ते में SOP तैयार करने के दिए निर्देश

नई दिल्ली: देशभर में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर ठगी के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर म्यूल अकाउंट्स (फर्जी या दूसरों के नाम पर संचालित बैंक खाते) और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े खातों से निपटने के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करे।

अदालत ने यह भी कहा कि तैयार की गई SOP की प्रति देश के सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी जाए, ताकि साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में एक समान प्रक्रिया अपनाई जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि डिजिटल अरेस्ट के जरिए होने वाली ठगी आम लोगों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है और इससे निपटने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), बैंकों और अन्य एजेंसियों की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के सामने रखी गई। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बाद डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में कुछ कमी देखने को मिली है।

अदालत के समक्ष पेश आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में डिजिटल अरेस्ट से संबंधित शिकायतों की संख्या 1,23,672 थी, जो 2025 में घटकर 58,249 रह गई। वहीं 30 जून 2026 तक ऐसे मामलों की संख्या 16,377 दर्ज की गई है। अदालत ने इस गिरावट को सकारात्मक संकेत बताया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, इसलिए निगरानी और सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मनी रिस्टोरेशन मैकेनिज्म का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए अब तक 36,290 मामलों में लगभग 18.05 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए जा चुके हैं। अदालत ने इसे एक प्रभावी व्यवस्था बताते हुए राज्यों को इसे और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि ई-जीरो FIR सिस्टम फिलहाल 19 राज्यों में लागू है, जबकि केवल 14 राज्यों ने स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर स्थापित किए हैं। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से साइबर अपराध से निपटने के लिए आवश्यक संस्थागत ढांचा जल्द विकसित करने को कहा।

CBI की जांच का हवाला देते हुए अदालत ने बताया कि एजेंसी ने अब तक 10 डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच शुरू की है। एक मामले में 238 पीड़ितों, 67 बैंक खातों और लगभग 80 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला है। इस मामले में 16 राज्यों के 93 स्थानों पर छापेमारी भी की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

  • RBI चार सप्ताह के भीतर म्यूल अकाउंट्स और साइबर फ्रॉड से जुड़े खातों पर SOP तैयार करे।
  • SOP की प्रति सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी जाए।
  • सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ग्रिवांस रिड्रेसल मॉड्यूल और मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल को पूरी तरह लागू करें।
  • आम नागरिकों को इन व्यवस्थाओं की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
  • सभी हाईकोर्ट अपने अधीनस्थ न्यायालयों को इस व्यवस्था की जानकारी दें, ताकि साइबर फ्रॉड के मामलों में बैंक खाते फ्रीज होने पर पीड़ित पहले उपलब्ध वैधानिक तंत्र का लाभ उठा सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से निपटने के लिए बैंकिंग प्रणाली, जांच एजेंसियों और न्यायिक तंत्र के बीच प्रभावी समन्वय बेहद जरूरी है। अदालत ने कहा कि तकनीक आधारित अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए समयबद्ध और एकीकृत कार्रवाई ही सबसे प्रभावी उपाय होगी।

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