नई दिल्ली: E20 पेट्रोल नीति के विरोध में मंगलवार को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पार्टी कार्यालय से प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला। हालांकि, पुलिस ने उनके काफिले को फिरोजशाह कोटला रोड के पास रोक दिया। इसके बाद केजरीवाल अपने समर्थकों और पार्टी नेताओं के साथ सड़क पर धरने पर बैठ गए।
मार्च में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान E20 नीति के विरोध में नारेबाजी की गई और केंद्र सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार की मांग की गई।
पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोका
प्रदर्शनकारियों का काफिला जैसे ही प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ा, पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें निर्धारित मार्ग पर आगे जाने की अनुमति नहीं दी। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद केजरीवाल और अन्य नेता सड़क पर बैठ गए और वहीं विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ समय तक बातचीत भी हुई, लेकिन मार्च को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली। मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
E20 नीति को लेकर AAP का विरोध
आम आदमी पार्टी का कहना है कि E20 पेट्रोल नीति को जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है और इसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यह मार्च E20 नीति के विरोध और जनता की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
मार्च शुरू होने से पहले अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर और पत्र सौंपना चाहते हैं। उनका दावा था कि बड़ी संख्या में लोगों ने E20 नीति को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
पहले भी उठाया था मुद्दा
सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर एक राष्ट्रीय टाउन हॉल कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने E20 नीति को लेकर विस्तार से अपनी आपत्तियां रखीं और केंद्र सरकार से तीन प्रमुख मांगें करने की बात कही।
पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार को इस नीति के प्रभाव, वाहन उपयोगकर्ताओं की तैयारियों और संभावित आर्थिक असर पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए।
E20 पेट्रोल क्या है?
E20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए इस नीति को लागू कर रही है। सरकार का तर्क है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और पर्यावरणीय प्रदूषण में कमी आएगी।
हालांकि, इस नीति को लेकर विभिन्न वर्गों में अलग-अलग राय है। कुछ विशेषज्ञ इसे ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ईंधन की दिशा में सकारात्मक कदम मानते हैं, जबकि कुछ लोग पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव और लागत को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल दिल्ली में E20 नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने और उसके बाद धरना शुरू होने से यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

