लेह: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में शामिल होने के बाद अपने गृह क्षेत्र लेह-लद्दाख लौट गए हैं। वापसी के दौरान उन्होंने वंदे भारत एक्सप्रेस से यात्रा की और ट्रेन की सुविधाओं की सार्वजनिक रूप से सराहना की। हालांकि उनकी इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। अब अपने गांव पहुंचने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर आलोचकों को जवाब दिया और लोगों से हर सकारात्मक बात को राजनीति से न जोड़ने की अपील की।
वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने वंदे भारत की तारीफ इसलिए की क्योंकि उन्हें यात्रा का अनुभव अच्छा लगा। उनके अनुसार, यदि किसी सार्वजनिक सेवा में सुधार हुआ है या कोई व्यवस्था बेहतर काम कर रही है, तो उसकी सराहना करना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि किसी अच्छी चीज की प्रशंसा करने का मतलब किसी राजनीतिक दल या सरकार का समर्थन करना नहीं होता।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी मानसिकता विकसित हो गई है, जहां हर बयान को राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है। वांगचुक ने लोगों से आग्रह किया कि वे तथ्यों और अनुभवों के आधार पर राय बनाएं और अनावश्यक राजनीतिक ध्रुवीकरण से बचें।
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में छात्र आंदोलनों और NEET पेपर लीक से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि छात्रों के आंदोलन के दौरान जो लिखित आश्वासन दिए गए थे, उन्हें जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने NEET पेपर लीक मामले में कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और ऐसे परिवारों को उचित मुआवजा और न्याय देने की मांग दोहराई। वांगचुक ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर उठे सवालों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इसका असर देश के भविष्य पर पड़ेगा।
वंदे भारत एक्सप्रेस की तारीफ को लेकर हुए विवाद पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय रेल देश की संपत्ति है और उसमें हुए सुधार की सराहना किसी भी नागरिक द्वारा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संस्थाओं की उपलब्धियों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
वांगचुक ने लोगों से संवाद और विवेकपूर्ण सोच को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति और प्रशंसा दोनों के लिए जगह होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे माहौल की जरूरत है जहां लोग बिना डर और बिना राजनीतिक लेबल के अपनी ईमानदार राय व्यक्त कर सकें।
फिलहाल सोनम वांगचुक का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और उनके बयान पर समर्थकों तथा आलोचकों के बीच चर्चा जारी है।

