नई दिल्ली: संसद में पब्लिक एग्जामिनेशंस (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने देश में बढ़ते पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार और संसद का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि सख्त और प्रभावी कानून से ही संभव है। उन्होंने इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, सुरक्षा और भरोसा बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राघव चड्ढा ने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं। कई छात्र रोजाना 15 से 18 घंटे तक पढ़ाई करते हैं, जबकि उनकी परीक्षा केवल कुछ घंटों की होती है। ऐसे में यदि एक मोबाइल कैमरे से पेपर की तस्वीर लेकर उसे व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या अन्य डिजिटल माध्यमों से लीक कर दिया जाए, तो छात्रों की वर्षों की मेहनत, सपने और भविष्य एक झटके में प्रभावित हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह छात्रों के आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में उनके भरोसे को भी गहरा नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था और कठोर कानूनी प्रावधान जरूरी हैं।
सदन में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा, “जैसे कैंसर का इलाज सिर्फ साधारण दवा से नहीं हो सकता, वैसे ही पेपर लीक जैसी बीमारी का इलाज केवल मीडिया में बयान देने से नहीं होगा। इसके लिए सख्त कानून और प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है।”
उन्होंने विशेष रूप से NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका गुस्सा और पीड़ा पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आए पेपर लीक मामलों ने लाखों युवाओं को मानसिक तनाव और अनिश्चितता में धकेला है।
राघव चड्ढा ने कहा कि जब कोई छात्र NEET जैसी परीक्षा की तैयारी करता है, तो केवल वही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार उस संघर्ष का हिस्सा बनता है। माता-पिता आर्थिक और मानसिक रूप से सहयोग करते हैं और परिवार अपने कई सपनों को छात्रों की सफलता से जोड़ देता है। इसलिए पेपर लीक का असर केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। लोकतंत्र में छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान नीति और कानून के माध्यम से होना चाहिए।
चर्चा के दौरान उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि नया कानून केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि पेपर लीक माफिया, संगठित गिरोहों और तकनीक का दुरुपयोग करने वाले नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने, डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने और परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार लागू करने की भी मांग की।
राघव चड्ढा ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है, तो छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

