भोपाल: NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी बीच मध्य प्रदेश में भी परीक्षा घोटालों और पेपर लीक से जुड़े मामलों को लेकर सख्त कदम उठाया गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक, फर्जी उम्मीदवारों के जरिए परीक्षा दिलाने, अनुचित साधनों के इस्तेमाल और अन्य परीक्षा संबंधी अपराधों के मामलों की जल्द सुनवाई के लिए प्रदेश में चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए हैं।
हाई कोर्ट की इस व्यवस्था का उद्देश्य परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा करना और दोषियों के खिलाफ जल्द कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। अदालत ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने का हरसंभव प्रयास किया जाए।
भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में विशेष अदालतें
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की पहल पर प्रदेश के चार प्रमुख शहरों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया गया है। इनमें भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर शामिल हैं।
इन अदालतों के लिए संबंधित जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों को नामित किया गया है। भोपाल में प्रवीण पटेल, 18वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश को जिम्मेदारी दी गई है। ग्वालियर में विशाल अखंड, 8वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश को विशेष अदालत के लिए नामित किया गया है। जबलपुर में आनंद कुमार सेहलाम, 27वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश और इंदौर में डॉ. शुभ्रा सिंह, 26वें जिला एवं सत्र न्यायाधीश को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
किन मामलों की होगी सुनवाई?
इन विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दर्ज संबंधित अपराधों को भी इन अदालतों में सुना जाएगा।
इनमें प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल, इम्पर्सोनेशन यानी किसी अन्य व्यक्ति की जगह परीक्षा देना और सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अन्य अपराध शामिल होंगे। राज्य या केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित जांच एजेंसियों की ओर से की गई जांच से जुड़े मामलों की सुनवाई भी इन विशेष अदालतों में की जा सकेगी।
तीन महीने में फैसला सुनाने पर जोर
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने और फैसला सुनाने का हरसंभव प्रयास किया जाए। इसका मकसद परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया को कम करना और पीड़ित छात्रों को जल्द न्याय दिलाना है।
अदालत का मानना है कि मामलों के त्वरित निपटारे से परीक्षा धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी। इससे संगठित परीक्षा घोटालों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
73 परीक्षाओं को लेकर उठे सवाल
मध्य प्रदेश में परीक्षा व्यवस्था को लेकर यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब वर्ष 2020 से जून 2026 के बीच मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित 73 परीक्षाओं को लेकर कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद सवाल उठे हैं।
हाई कोर्ट की नई व्यवस्था को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों में जल्द अभियोजन और न्याय सुनिश्चित होगा। साथ ही, इससे सार्वजनिक परीक्षाओं और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
मध्य प्रदेश में परीक्षा घोटालों के खिलाफ यह पहल छात्रों और अभिभावकों के बीच भरोसा कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब इन विशेष अदालतों के जरिए लंबित और नए मामलों की सुनवाई कितनी तेजी से होती है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

