महाराजगंज: भारत से बिना वैध वीजा और दस्तावेजों के नेपाल जाने की कोशिश कर रहे एक अमेरिकी नागरिक को भारत-नेपाल सीमा पर गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान 36 वर्षीय जॉर्डन ब्राउन के रूप में हुई है, जो अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य का निवासी बताया जा रहा है। उसके पास से नकदी और दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, लेकिन कोई पासपोर्ट या अन्य वैध यात्रा दस्तावेज नहीं मिला।
जॉर्डन ब्राउन की गिरफ्तारी के बाद उसकी ओर से दिए जा रहे अलग-अलग बयानों ने सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। उसके दावों और संदिग्ध गतिविधियों की तुलना कुछ महीने पहले गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के मामले से की जा रही है।
सीमा पर रोकते ही भागने लगा
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह सशस्त्र सीमा बल के जवान सोनौली कोतवाली क्षेत्र के मैनिहवा के पास सीमा स्तंभ संख्या 516 के आसपास गश्त कर रहे थे। इसी दौरान भारत की ओर से नेपाल की तरफ जा रहा एक संदिग्ध व्यक्ति जवानों को दिखाई दिया।
जवानों ने उसे जांच के लिए रोकने का प्रयास किया तो वह कथित रूप से हाथ छुड़ाकर भागने लगा। इसके बाद जवानों ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। तलाशी और पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम जॉर्डन ब्राउन बताया।
31 हजार रुपये और दो मोबाइल बरामद
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, जॉर्डन ब्राउन के पास से 31 हजार 460 रुपये नकद और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। उसके पास न तो पासपोर्ट था और न ही भारत या नेपाल में यात्रा करने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज मिला।
प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि वह बेंगलुरु से सोनौली सीमा तक पहुंचा था और वहां से गैरकानूनी तरीके से नेपाल में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा था। अब पुलिस और खुफिया एजेंसियां उसके यात्रा मार्ग, भारत आने के उद्देश्य और मोबाइल फोन में मौजूद जानकारियों की जांच कर रही हैं।
पूछताछ में बदलता रहा बयान
अधिकारियों के अनुसार, जॉर्डन ब्राउन पूछताछ के दौरान अपनी यात्रा और पहचान को लेकर अलग-अलग दावे करता रहा। उसने खुद को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज का पूर्व सैनिक बताया। इसके अलावा उसने दावा किया कि वह ‘नाज़’ नाम के एक परिचित व्यक्ति की तलाश कर रहा है।
हालांकि, उसके दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कई देशों की यात्रा को लेकर दिए गए उसके कथित बयानों और बिना दस्तावेज सीमा पार करने की कोशिश ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
मैथ्यू वैनडाइक मामले से तुलना
जॉर्डन ब्राउन के मामले की तुलना अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक से की जा रही है। वैनडाइक उन सात विदेशी नागरिकों में शामिल था, जिन्हें 17 मार्च को भारत के खिलाफ कथित साजिश से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था।
आरोप था कि वैनडाइक भारत के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हुआ और वहां जातीय हथियारबंद समूहों तथा भारत में प्रतिबंधित कुछ संगठनों को प्रशिक्षण देने की कोशिश कर रहा था।
वैनडाइक खुद को सिक्योरिटी एनालिस्ट, वॉर कॉरेस्पोंडेंट और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर बताता था। वह वर्ष 2011 में लीबिया के गृह युद्ध के दौरान विद्रोही लड़ाकों के साथ जुड़ने के बाद चर्चा में आया था। बाद में उसने ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नाम का संगठन बनाया, जो संघर्ष वाले क्षेत्रों में स्थानीय हथियारबंद समूहों को प्रशिक्षण देने का दावा करता है।
फिलहाल जॉर्डन ब्राउन से पूछताछ जारी है और एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसका उद्देश्य केवल अवैध रूप से सीमा पार करना था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

