10 Jul 2026, Fri

माइलेज, परफॉर्मेंस से लेकर कीमत तक, सरकार ने दिए 20% इथेनॉल वाले E20 पेट्रोल से जुड़े सभी सवालों के जवाब

 

देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिक्स पेट्रोल यानी E20 पेट्रोल को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कई लोगों के मन में यह सवाल है कि भारत ने इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य को इतनी तेजी से क्यों आगे बढ़ाया और क्या यह कदम जल्दबाजी में लिया गया है। इन सवालों और चिंताओं को दूर करने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को लेकर तथ्य आधारित स्पष्टीकरण जारी किया है।

मंत्रालय ने 23 जून, 2026 को एक प्रेस रिलीज के जरिए इस कार्यक्रम से जुड़ी गलत जानकारियों को दूर करने की कोशिश की थी। इसके बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी 4 जुलाई, 2026 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में E20 पेट्रोल और वाहनों पर इसके असर को लेकर अपनी बात रखी। इसके बावजूद सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच कई तरह की आशंकाएं बनी हुई हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने E20 पेट्रोल से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ब्राजील जैसे देशों को इथेनॉल पेट्रोल अपनाने में दशकों लग गए, तो भारत ने इसे इतनी तेजी से क्यों लागू किया। सरकार के मुताबिक, इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। एक सदी से भी पहले हेनरी फोर्ड ने अपनी ‘मॉडल टी’ कार को इथेनॉल से चलाने के लिए डिजाइन किया था। ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में भी इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम भी नया नहीं है। इसकी शुरुआत 2001 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। साल 2004 में इस कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की गई और 2006 तक कई राज्यों में E5 यानी 5 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग लागू कर दी गई थी। बाद में जनवरी 2013 में भारत के राजपत्र में इसकी पॉलिसी रूपरेखा भी अधिसूचित की गई थी। यानी भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग का सफर दो दशक से ज्यादा पुराना है।

हालांकि, उस समय देश में इथेनॉल उत्पादन की क्षमता सीमित थी। भारत मुख्य रूप से गन्ने पर निर्भर था, जो एक मौसमी फसल है। सालाना इथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 400 करोड़ लीटर के आसपास थी, जो ब्लेंडिंग के बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। यही वजह रही कि 2014 तक इथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर लगभग 1.5 प्रतिशत पर ही अटका रहा।

सरकार के अनुसार असली चुनौती इथेनॉल को ईंधन के रूप में स्वीकार करने की नहीं, बल्कि पर्याप्त मात्रा में इसका उत्पादन करने की थी। इसी कमी को दूर करने के लिए मई 2018 में जैव-ईंधन पर राष्ट्रीय नीति लाई गई। इस नीति के तहत इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने, अलग-अलग स्रोतों से कच्चा माल जुटाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

सरकार का दावा है कि E20 पेट्रोल न केवल आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा, बल्कि किसानों की आय और देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती देगा। हालांकि, उपभोक्ताओं की चिंताओं को देखते हुए मंत्रालय ने साफ किया है कि इस कार्यक्रम से जुड़े सभी सवालों के जवाब तथ्यों और सबूतों के आधार पर दिए जा रहे हैं।

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