10 Jul 2026, Fri

दिल्ली में तैनात सैनिक का हार्ट अटैक से निधन, लुधियाना में सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

 

पंजाब के लुधियाना जिले में शुक्रवार को नायक सिकंदर सिंह का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। वह जगराओं के पास स्थित गगड़ा गांव के रहने वाले थे और भारतीय सेना की 5 सिख लाइट इन्फैंट्री में तैनात थे। 33 साल की उम्र में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। बताया जा रहा है कि यह घटना दिल्ली में ड्यूटी के दौरान हुई। शुक्रवार सुबह उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

जैसे ही नायक सिकंदर सिंह का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, माहौल बेहद भावुक हो गया। पत्नी, बेटियां और परिजन बिलख पड़े। गांव के लोगों के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। नम आंखों से लोगों ने देश के जवान को आखिरी विदाई दी। अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके छोटे भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी।

नायक सिकंदर सिंह अपने परिवार में तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। वह करीब 16 साल पहले भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। एक साधारण मजदूर परिवार से आने वाले सिकंदर सिंह ने कम उम्र से ही परिवार की जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी थीं। मेहनत, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के दम पर उन्होंने सेना में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनके निधन से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव और इलाके में शोक की लहर है।

सिकंदर सिंह का विवाह करीब पांच साल पहले रमनजीत कौर से हुआ था। वह अपने पीछे पत्नी और दो छोटी बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी एक बेटी करीब ढाई साल की है, जबकि दूसरी बेटी मात्र आठ महीने की है। पिता की अंतिम यात्रा के दौरान दोनों मासूम बेटियों को देख हर किसी की आंखें नम हो गईं।

पत्नी रमनजीत कौर ने बताया कि चार दिन पहले उनकी अपने पति से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। उस दौरान सिकंदर सिंह ने कहा था कि उनके सीने में बहुत दर्द हो रहा है और वह ठीक से बात भी नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद वह अपनी बेटियों से भी बात नहीं कर सके। पत्नी ने भावुक होते हुए बताया कि सिकंदर सिंह ने शादी के बाद उनकी पढ़ाई पूरी करवाई। उन्होंने उन्हें एमए और बीएड तक पढ़ाया और हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

रमनजीत कौर ने सरकार से अपनी बेटियों के भविष्य की सुरक्षा और परिवार को उचित सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सिकंदर सिंह हमेशा परिवार और देश के लिए समर्पित रहे। उनके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे नायक सिकंदर सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान कैप्टन पूर्ण सिंह और हवलदार अमरपाल सिंह समेत सेना के कई जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। गांव के लोगों ने कहा कि सिकंदर सिंह जैसे बेटे पर पूरे इलाके को गर्व है। उनका बलिदान और सेवा हमेशा याद रखी जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *