10 Jul 2026, Fri

‘मेरी हत्या हो सकती है, फिर भी जाऊंगी’, शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने को लेकर किया बड़ा ऐलान; बताया कब करेंगी सरेंडर

 

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने को लेकर बड़ा बयान दिया है। भारत में निर्वासन में रह रहीं हसीना ने कहा है कि वह अवामी लीग के अन्य निर्वासित नेताओं के साथ दिसंबर के आसपास स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटने का इरादा रखती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी हत्या भी हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश वापस जाना चाहती हैं।

एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश लौटने के बाद वह न्यायिक अदालतों के सामने सरेंडर करने की योजना बना रही हैं। उन्होंने साफ किया कि उनकी वापसी को लेकर ढाका की मौजूदा सरकार या अधिकारियों के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। हसीना ने कहा कि जोखिम बहुत बड़ा है, लेकिन वह अपने देश और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को छोड़कर हमेशा निर्वासन में नहीं रह सकतीं।

शेख हसीना ने कहा कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भारी दमन हो रहा है। उन्होंने अपने समर्थकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर मौत आती है, तो वह अपनी धरती पर ही आना पसंद करेंगी। उनके मुताबिक, बांग्लादेश वही देश है जहां उनके माता-पिता दफन हैं और जहां उनके परिवार ने खून बहाया। हसीना का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की राजनीति पहले से ही बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है।

अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले बड़े आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इसके बाद वह भारत चली गई थीं। उस आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौतों को लेकर बांग्लादेश में उनके खिलाफ गंभीर मामले चलाए गए। बाद में बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। हसीना ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।

न्यायाधिकरण ने आरोप लगाया था कि 2024 के प्रदर्शनों के दौरान राज्य की कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों की मौतों को रोकने में हसीना नाकाम रहीं या उन्होंने बल प्रयोग को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। इसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मौत की सजा सुनाई गई, जबकि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पांच साल की जेल की सजा दी गई।

शेख हसीना ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा कि अवामी लीग को प्रतिबंधित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी अब भी बांग्लादेश की राजनीति में मजबूत जनाधार रखती है और जनता को ही यह तय करना चाहिए कि उनके शासनकाल का आकलन कैसे किया जाए।

हसीना की संभावित वापसी बांग्लादेश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर सकती है। एक तरफ उनके समर्थक इसे राजनीतिक वापसी की शुरुआत मान रहे हैं, वहीं विरोधी इसे कानून और न्याय की परीक्षा बता रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि दिसंबर तक शेख हसीना सचमुच बांग्लादेश लौटती हैं या नहीं।

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