पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा उपचुनाव 2026 के लिए अपने तीन उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर पार्टी छोड़ने वाले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक को राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि ये तीनों नेता हाल ही में टीएमसी से इस्तीफा देने के बाद गुरुवार को ही बीजेपी में शामिल हुए थे और कुछ ही घंटों बाद पार्टी ने उन्हें टिकट दे दिया।
बीजेपी की ओर से जारी उम्मीदवारों की सूची में तीनों नामों की घोषणा ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि बीजेपी ने अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारकर टीएमसी को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। तीनों नेता पहले तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखते हैं।
सुखेंदु शेखर रॉय ने 8 जून को टीएमसी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद सुष्मिता देव ने 10 जून और प्रकाश चिक बराइक ने 11 जून को पार्टी से दूरी बना ली थी। तीनों नेताओं ने टीएमसी नेतृत्व से नाराजगी जताई थी और आरोप लगाया था कि पार्टी में फैसले मनमाने तरीके से लिए जा रहे हैं। इस्तीफों के बाद से ही इनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं, जो अब सच साबित हुईं।
सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर काफी चर्चा में रहा है। वह पहले कांग्रेस में थीं और बाद में टीएमसी में शामिल हुईं। अब उनका बीजेपी में जाना एक और बड़ा राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है। वहीं सुखेंदु शेखर रॉय लंबे समय तक टीएमसी के वरिष्ठ चेहरों में गिने जाते रहे हैं। प्रकाश चिक बराइक भी उत्तर बंगाल की राजनीति में अहम नाम माने जाते हैं।
पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव 24 जुलाई को होने हैं। ये सीटें तीनों नेताओं के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। बीजेपी को उम्मीद है कि इन उम्मीदवारों के जरिए पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी। वहीं टीएमसी के लिए यह घटनाक्रम बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि एक ही महीने में उसके तीन पूर्व सांसदों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम बंगाल में बीजेपी की नई रणनीति का हिस्सा है। पार्टी टीएमसी से आए अनुभवी नेताओं को आगे कर राज्य में संगठन और चुनावी समीकरण मजबूत करना चाहती है। दूसरी ओर, टीएमसी इस घटनाक्रम को अवसरवादी राजनीति बता सकती है।
फिलहाल तीनों उम्मीदवारों के नामों के ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव पर टिकी है, जहां यह साफ होगा कि बीजेपी की यह रणनीति कितनी असरदार साबित होती है।

