4 Jul 2026, Sat

खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ी लाखों की भीड़, भारत समेत 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल

तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कई दिवसीय कार्यक्रम राजधानी तेहरान में शुरू हो गए हैं। ग्रैंड मोसल्ला परिसर में खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां बड़ी संख्या में आम नागरिकों, ईरानी अधिकारियों, धर्मगुरुओं और विदेशी प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। ईरानी प्रशासन ने कार्यक्रमों में लाखों लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया है, हालांकि उपस्थित लोगों की वास्तविक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ईरानी अधिकारियों का दावा है कि 100 से अधिक देशों के अधिकारी, धार्मिक नेता और राजनीतिक प्रतिनिधि अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार 30 से अधिक देशों ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की इच्छा जताई थी। चीन, रूस, पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया और क्षेत्र के कई अन्य देशों के प्रतिनिधि तेहरान पहुंचे हैं।

ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम दर्शन

खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में कांच के ताबूत में रखा गया। उनके ताबूत के पास काली पगड़ी रखी गई, जिसे शिया परंपरा में पैगंबर मोहम्मद के वंश से संबंध का प्रतीक माना जाता है। अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए उनके परिवार के कुछ सदस्यों के ताबूत भी परिसर में रखे गए। इनमें उनकी बेटी, दामाद, पोती और परिवार के अन्य सदस्य शामिल बताए गए हैं।

अंतिम दर्शन के दौरान कई लोग रोते और धार्मिक परंपरा के अनुसार शोक व्यक्त करते दिखाई दिए। कुछ लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए तथा हमले का बदला लेने की मांग की। शहर के प्रमुख मार्गों और इमारतों पर खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े पोस्टर और शोक संदेश लगाए गए हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तेहरान में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती भी की गई है।

फरवरी के हवाई हमले में हुई थी मौत

अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हवाई हमलों में मौत हुई थी। वह 86 वर्ष के थे और लगभग 37 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। हमले के बाद ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच संघर्ष और तनाव तेजी से बढ़ गया था।

खामेनेई का अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ईरानी नेतृत्व की ओर से एकता और शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि युद्ध और नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद देश की राजनीतिक तथा धार्मिक व्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

मशहद में किया जाएगा सुपुर्द-ए-खाक

तेहरान से शुरू हुए अंतिम संस्कार के कार्यक्रम कई दिनों तक चलेंगे। पार्थिव शरीर को ईरान के पवित्र शहर कोम और इराक के नजफ तथा कर्बला ले जाने की योजना है। अंतिम चरण में खामेनेई को नौ जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में इमाम रजा की दरगाह के पास सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

देश में राष्ट्रीय शोक के बीच अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। आने वाले दिनों में विभिन्न शहरों में होने वाली अंतिम यात्राओं में भी बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।

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